MUZAFFARPUR

‘तुर्की नाम सुनना तक पसंद नहीं’, बिहार के इस गांव के लोग सरकार से क्यों करने लगे नाम बदलने की मांग?

मुजफ्फरपुर: ‘तुर्की भारत का दुश्मन है. हमलोगों को तुर्की नाम भी सुनना पसंद नहीं, इसलिए सरकार से मांग करते हैं कि नाम बदल दिया जाए’.

जब से भारत-पाकिस्तान के बीच लड़ाई में तुर्की (आधिकारिक नाम तुर्किये) ने पाकिस्तान का साथ दिया है, तब से बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित तुर्की गांव के लोग बेहद नाराज हैं. इन लोगों ने राज्य सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द उनके गांव का नाम बदला जाए.

तुर्किये के रवैये से तुर्की गांव में आक्रोश

असल में मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड में एक गांव हैं, जिसका नाम ‘तुर्की’ है. भारत-पाकिस्तान ‘युद्ध’ में जिस तरह से तुर्की ने भारत के साथ दुश्मनी निभाते हुए पाकिस्तान का साथ दिया है, उसके बाद से इस गांव के नाम को लेकर विवाद शुरू हो गया है. स्थानीय लोग गांव का नाम बदलने की मांग कर रहे है. लोगों का कहना है कि अब हमारे लिए ‘तुर्की’ नाम सुनना भी बर्दाश्त नहीं होगा, लिहाजा इसे बदला जाए.

तुर्की गांव का नाम बदलने की मांग

इसी गांव के रहने वाले चुन्नू ठाकुर ने भी सरकार से तुर्की नाम बदलने की मांग की है. वह कहते हैं, ‘भारत पाकिस्तान के बीच लड़ाई हुई. इस दौरान तुर्की देश ने पाकिस्तान का साथ दिया. हमारे गांव का नाम भी तुर्की गांव है. ऐसे में मेरी मांग है कि सरकार हमारे गांव का नाम बदल दे. देश के किसी शहीद के नाम पर गांव का नाम रखा जाए.’

ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ा नाम हो

तुर्की गांव के सिविल कोर्ट के वकील सूरज कुमार ने कहा कि तुर्की असल में पाकिस्तान का मित्र देश है. ऐसे में हमारे देश अंदर जितने भी गांवों का नाम तुर्की है, उसे बदला जाना चाहिए. वे कहते हैं, ‘मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड में स्थित मारे गांव का नाम भी तुर्की है, ऐसे में गांव का नाम भारत के सक्सेसफुल मिशन ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर रख देना चाहिए, यह मेरा देश के प्रधानमंत्री से आग्रह है’.

बीजेपी नेता ने क्या बोला?

स्थानीय बीजेपी नेता शशि रंजन तो गांव के नाम के साथ-साथ तुर्की स्टेशन के नाम को भी बदलने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कई शहीद हुए हैं, जिनके नाम पर गांव का नाम रखा जाना चाहिए. सरकार किसी भी महापुरुष के नाम पर गांव का नाम रख दें लेकिन तुर्की नाम बदला जाए.

कांग्रेस ने भी किया समर्थन: युवा कांग्रेस नेता शांतनु तिवारी ने भी नाम बदलने का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि तुर्किये देश ने पाकिस्तान का साथ दिया था.

वैसे भी उस देश से हम लोगों का कोई लेना-देना नहीं है, क्यों तुर्की नाम पर हमारे गांव का नाम रखा गया पता नहीं लेकिन वर्तमान स्थिति में इस गांव का नाम जरूर बदलना चाहिए.

नीतीश के मंत्री ने की नाम बदलने की मांग: जेडीयू नेता और समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने कहा कि ‘तुर्की’ का नाम बदल देने में कोई हर्ज नहीं है. उन्होंने कहा, ‘जो भी भारत के खिलाफ किसी भी देश के द्वारा अगर भारत को कमजोर करने या साजिश रचने का करे तो उसको जवाब जरूर मिलना चाहिए.

हालांकि मुजफ्फरपुर जिले में जो तुर्की स्थान है, उसका तुर्की देश से कोई लेना-देना नहीं है. नाम बदल जाएगा तो फिर दूसरा नाम आ जाएगा. लोग उसका स्वागत करेंगे, हमलोग भी स्वागत करेंगे’.

बीजेपी ने भी नाम बदलने की वकालत

वहीं, बीजेपी नेता और पथ निर्माण मंत्री नितिन नबीन ने भी नाम बदलने की वकालत की है. उन्होंने कहा, ‘जिस नाम से कलंक दिखता हो, निश्चित रूप से उस नाम को जरूर बदल देना चाहिए. तुर्की ने भारत-पाकिस्तान के युद्ध में पाकिस्तान के पक्ष में जैसा खेल खेला है, निश्चित रूप से देश की जनता जवाब देना चाहती है और उस नाम से हर व्यक्ति को परहेज है’.

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