पटना : जदयू कार्यालय में चुनावी साल में भव्य तरीके से भामाशाह जयंती समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को भी आमंत्रित किया गया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहुंचे भी लेकिन 10 मिनट भी मुश्किल से नहीं ठहरे.

जब नीतीश कुमार खुद स्वागत करने लगे
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पहुंचने पर उनका स्वागत जब किया जाने लगा तो मुख्यमंत्री ने सबसे पहले पार्टी नेताओं का ही स्वागत करना शुरू कर दिया. सभी का साफा और गमछा से सीएम स्वागत करने लगे. विधान पार्षद ललन सर्राफ, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, मंत्री सुमित सिंह और एक-एक कर तमाम नेताओं का मुख्यमंत्री ने स्वागत किया.

बिना भाषण दिए कार्यक्रम से निकल गए CM
कार्यक्रम में वैसे तो पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री पहुंचे थे, जो अपनी बात भी रखे लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिना भाषण दिए कुछ ही देर में पार्टी कार्यालय से बाहर निकल गए. हालांकि पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है कि मुख्यमंत्री बिना भाषण दिए कार्यक्रम से निकल गए हों.

इससे 2 दिन पहले विधि प्रकोष्ठ के कार्यक्रम में जरूर मुख्यमंत्री ने भाषण दिया था. पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनाव में पूरी ताकत से लग जाने का निर्देश भी दिया था. आज पार्टी नेताओं को उम्मीद थी कि फिर से मुख्यमंत्री कुछ दिशा निर्देश देंगे लेकिन आज मुख्यमंत्री बहुत ज्यादा देर रुके नहीं.

भामाशाह जयंती के बहाने वैश्य वोट बैंक पर निशाना
भामाशाह जयंती का आयोजन नीतीश कुमार के नजदीकी ललन सर्राफ की तरफ से किया गया था. पिछले साल भी ललन सर्राफ ने कार्यक्रम का आयोजन किया था. बता दें कि बिहार में भामाशाह जयंती के बहाने वैश्य वोटों को साधने की कोशिश होती रही है.

पुनाईचक पार्क में राजकीय कार्यक्रम
वहीं दूसरी ओर दानवीर भामाशाह की जयंती के अवसर पर पटना के पुनाईचक पार्क में आयोजित राजकीय कार्यक्रम में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, मंत्री नितिन नवीन मौजूद थे.

बिहार में तीन प्रतिशत वैश्य
कई दलों की ओर से भामाशाह जयंती मनाया गया है. बिहार में जातीय गणना के अनुसार 3% के करीब वैश्य वोट हैं लेकिन कई सीटों पर उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. बीजेपी इस वोट बैंक को अपना बताती रही है लेकिन सभी दल के नेता अपने साथ वैश्य वोट को जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं.



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