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पटना के रामकृष्ण नगर से नाबालिग लड़की के लापता होने के मामले में थानाप्रभारी के रवैए पर सख्त हुए डीजीपी विनय कुमार

पटना: राजधानी पटना के रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र से नाबालिग बेटी के लापता होने के बाद जो मंजर सामने आया है, उसने सियासत की फिज़ा को गरमा दिया है। परिवार जब इंसाफ की दरख़्वास्त लेकर थाने की चौखट पर पहुँचा तो उम्मीद थी कि कानून का निज़ाम फौरन हरकत में आएगा, लेकिन इल्ज़ाम है कि थाना प्रभारी ने हैरतअंगेज़ अंदाज़ में कह दिया “आपकी बेटी ऐश-मौज करके वापस लौट आएगी।” इस बयान ने महज़ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे बिहार की ज़मीर को झकझोर दिया है।

मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिसिया रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि उनकी फरियाद को हल्के में लिया गया, जैसे कोई संगीन वारदात नहीं बल्कि मामूली गुमशुदगी हो। “ऐश-मौज करके लौट आएगी” जैसी कथित टिप्पणी ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर साया डाल दिया है।

उधर, बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित पदाधिकारी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। डीजीपी ने कहा कि ऐसे पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

बता दें यह मुद्दा जब विधान परिषद में उठा तो सुनील सिंह ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। वहीं भाई वीरेंद्र  ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे पदाधिकारी को फौरन बर्खास्त किया जाए। विपक्ष ने इसे “कानून-व्यवस्था की नाकामी” करार देते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल गूंज रहा है कि क्या कानून का रखवाला खुद लापरवाह हो सकता है? लगातार सामने आ रही घटनाओं ने राजधानी में लॉ-एंड-ऑर्डर की साख पर धब्बा लगाया है। आम जनता के दिल में दहशत और अविश्वास की लकीर गहरी होती जा रही है। अब निगाहें प्रशासनिक एक्शन पर टिकी हैं क्या यह मामला महज़ बयानबाज़ी बनकर रह जाएगा, या फिर वाकई जवाबदेही तय होगी? बिहार की सियासत में यह कांड फिलहाल एक बड़ा सियासी तूफ़ान बन चुका है।

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