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बिहार पुलिस में महा-बहाली: 17,000 SAP जवानों की नियुक्ति को हरी झंडी, जानें नई सैलरी और नियम

बिहार: बिहार सरकार ने राज्य की विधि-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है । गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (SAP) के कुल 17,000 पदों पर अनुबंध के आधार पर नियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी है । इस संबंध में सरकार के उप सचिव मनोज कुमार सिन्हा द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है ।

अर्धसैनिक बलों के पूर्व जवानों को भी मिलेगा मौका

अब तक सैप (SAP) बल में केवल भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों (Ex-Army) को ही अनुबंध पर लिया जाता था । लेकिन, नए आदेश के अनुसार अब सेना के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के सेवानिवृत्त अर्धसैनिक बलों (Ex-Paramilitary) को भी सैप बल में शामिल होने का मौका मिलेगा । राज्य में नवनियुक्त सिपाहियों के प्रशिक्षण में होने वाले विलंब को देखते हुए अतिरिक्त सैप बलों की सेवा लेना आवश्यक समझा गया है ।

मानदेय में जबरदस्त इजाफा, 35 हजार तक मिलेगी सैलरी

सरकार ने सैप जवानों के मानदेय (Salary) में भी आकर्षक वृद्धि की है । नए आदेश के तहत जे०सी०ओ० (JCO) को अब 35,000 रुपये, सैप जवानों को 30,000 रुपये और रसोइया को 25,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। यह बढ़ा हुआ मानदेय आदेश निर्गत होने की तिथि से ही प्रभावी होगा, जिससे वर्तमान में कार्यरत जवानों को भी सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा ।

पदों का पूरा विवरण और स्वीकृत बल

आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने कुल 17,000 पदों का ढांचा तैयार किया है । इसमें 150 जेसीओ, 16,300 सैप जवान और 550 रसोइया के पद शामिल हैं । वर्तमान में कार्यरत 1,717 सैप जवानों के अनुबंध का विस्तार करते हुए रिक्त पदों पर नई भर्तियां की जाएंगी ।

642 करोड़ रुपये के बजट की स्वीकृति

इस विशाल सुरक्षा बल के मानदेय भुगतान के लिए सरकार ने भारी-भरकम बजट आवंटित किया है । वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 642.09 करोड़ रुपये की अनुमानित व्यय राशि को मंजूरी दी गई है । इसके अलावा, वर्तमान वित्तीय वर्ष (जनवरी-मार्च 2026) के लिए वर्द्धित दर पर भुगतान हेतु लगभग 5.25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है ।

पुलिस महानिदेशक के नियंत्रण में होगी पूरी प्रक्रिया

इस पूरी राशि और बल के संचालन पर पुलिस महानिदेशक (DGP), बिहार का सीधा नियंत्रण होगा । जिला स्तर पर संबंधित जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक (SSP/SP) इसके आहरण एवं वितरण पदाधिकारी होंगे । यह निर्णय राज्य में उग्रवादी और हिंसात्मक गतिविधियों पर नियंत्रण रखने तथा कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है ।

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