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एनडीए में कुशवाहा पर फिर भारी पड़े ठाकुर; राजपूतों को 37 सीट, कोइरी को 23 टिकट

बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए ) के टिकट बंटवारे में राजपूत उम्मीदवारों ने टिकट लेने में कोइरी कैंडिडेट को पछाड़ दिया है। एनडीए दलों ने 243 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। गठबंधन में राजपूतों को 37 सीट मिली है, जबकि कुशवाहा को 23 सीटें। बिहार जातीय सर्वेक्षण में राजपूत आबादी 3.45 परसेंट आई थी, जबकि कोइरी-कुशवाहा 4.21 फीसदी मिले थे। 2.86 फीसदी मिले भूमिहारों को भी 31 सीट मिली है। ब्राह्मण आबादी 3.65 फीसदी, यानी राजपूतों से ज्यादा है, लेकिन उन्हें 14 सीट मिली।

एनडीए में पांच दल शामिल हैं- जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), लोक जनशक्ति पार्टी – रामविलास (एलजेपी-आर), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम)। इन सबने 84 सवर्णों को टिकट दिया है। इसके बड़े हिस्से पर 37 सीट के साथ राजपूतों ने कब्जा जमाया है। भूमिहार जाति के नेताओं को 31 सीट पर मौका मिला है। बची सीटों में 14 ब्राह्मण और 2 कायस्थ को लड़ाया गया है।

सवर्णों को टिकट देने में बीजेपी सबसे आगे रही। उसकी 101 सीटों में 48 उम्मीदवार इन्हीं चार जातियों से हैं। जेडीयू ने 22, लोजपा-आर ने 10, रालोमो और हम ने 2-2 अगड़ी जातियों के नेता को टिकट दिया है। राजपूत की बात करें तो बीजेपी ने 21, जेडीयू ने 10, लोजपा-आर ने 5 और रालोमो ने 1 ठाकुर को उतारा है। हम ने अपने कोटे की 6 सीटों में 2 भूमिहार चाचा-भतीजा को लड़ाया है, लेकिन राजपूत को टिकट नहीं दिया है।

लोकसभा चुनाव के दौरान एनडीए से कोइरी जाति के 4 और राजपूत जाति के 7 कैंडिडेट लड़े थे। दोनों जातियों के 2-2 कैंडिडेट हार गए। काराकाट में उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ पवन सिंह के निर्दलीय लड़ने से शाहाबाद और मगध के इलाकों में एनडीए के दलों को भारी नुकसान हुआ था। तब से कोइरी-कुशवाहा एनडीए की राजनीति में केंद्र में आ गए हैं। बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी इसी बिरादरी से हैं।

सीट बंटवारे में 6 सीट मिलने और महुआ सीट लेने से उपेंद्र कुशवाहा नाराज हुए तो गृहमंत्री अमित शाह ने नित्यानंद राय के साथ उन्हें तुरंत दिल्ली बुलाकर मनाया। फिर वो मान गए। राज्यसभा में अगला टर्म और विधान परिषद में सीट भी मिल गई। कुशवाहा ने 6 सीट के ऊपर अपने 2 नेताओं को बीजेपी और जेडीयू के सिंबल पर लड़वाने में भी कामयाबी पाई।

लेकिन हाल के दिनों में बीजेपी के सांसद राजीव प्रताप रूडी और जेडीयू के नेता आनंद मोहन राजपूतों की हिस्सेदारी और भागीदारी की बात उठाने लगे थे। आनंद मोहन तो किंगमेकर जैसी बातें सवर्णों के लिए करने लगे। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के कारण सवर्ण वोटर साथ रखने का दबाव भाजपा और एनडीए पर और बढ़ गया। शायद यही कारण है कि जातीय सर्वे में कोइरी से कम आबादी के बावजूद राजपूत और भूमिहार कैंडिडेट ज्यादा हैं।

ठाकुर और कोइरी जाति के बीच लोकसभा चुनाव में पैदा हुई खाई को पाटने के लिए भाजपा ने चुनाव से पहले पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा की मुलाकात कराई। इसे राजपूत-कुशवाहा के बीच एकजुटता की तरह पेश किया गया। पवन के खुद चुनाव लड़ने की चर्चा थी, लेकिन विरोध में बीवी ज्योति सिंह की सक्रियता के बाद उन्होंने चुनाव लड़ने की इच्छा त्याग दी।

 

 

 

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