भारत में कोरोनावायरस के केस और मौ’तें लगातार बढ़ रही हैं। इससे देश में वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन का ख’तरा बढ़ गया है, इसी को कोरोना का थर्ड फेज भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अब थर्ड फेज की दहलीज पर खड़ा है। इसकी असल तस्वीर लॉकडाउन खत्म होने यानी 14 अप्रैल से पहले साफ हो जाएगी। उन्होंने चे’तावनी भी दी है कि भारत में कोरोना का ग्राफ इटली जैसा ही दिख रहा है। अंतर बस समय का है।
कोरोनावायरस के मा’मलों और मौ’तों के लिहाज से देखें तो भारत तकरीबन इटली के रास्ते पर ही बढ़ रहा है। बस हम समय में उससे एक महीने पीछे हैं। वर्ल्ड मीटर के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल तक भारत में कोरोना के 1998 केस आए थे और 58 मौ’तें हुई थीं। एक महीने पीछे यानी एक मार्च के इटली के आंकड़े देखें तो वहां इस तारीख तक कोरोना के 1577 केस आए थे, जबकि मौ’तें 41 हुई थीं। सोमवार यानी छह अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस के 4778 केस सामने आ चुके हैं, जबकि 136 मौ’तें हुई हैं। अब इससे एक महीने पीछे चलें, यानी इटली में 6 मार्च तक का कोरोना ग्राफ देखें तो वहां 4636 केस आए थे, जबकि 197 मौ’तें हुई थीं।

रोजाना की स्थिति: भारत में अब रोज उतने ही केस आ रहे, जितने एक महीने पहले रोज इटली में आ रहे थे
भारत और इटली में रोजाना के केस और मौ’तों की संख्या भी लगभग एक जैसी ही है। यहां भी बस अंतर समय का है। एक महीने पहले इटली में रोजाना भारत जितने ही केस आ रहे थे और मौ’तें भी लगभग बराबर हो रही थीं। इटली में एक मार्च को 573 केस आए थे और 12 मौ’तें हुई थीं। एक महीने बाद भारत में एक अप्रैल को 601 केस आए और 23 मौ”तें हुईं।
रोजाना की मृ’त्युदर: भारत में कोरोना से रोज की औसत मृ’त्युदर भी एक महीने पहले के इटली जैसे ही है
कोरोनावायरस से भारत और इटली में रोजाना की मृत्युदर भी लगभग एक जैसी है। दोनों देशों के बीच अंतर सिर्फ समय का है। आंकड़ों पर गौर पर करें तो पता चलता है कि एक महीने पहले इटली में कोरोना से रोजाना की औसत मृ’त्युदर तकरीबन भारत के मौजूदा हालात जैसे ही थे। 1 मार्च को इटली में कोरोना से मृ’त्युदर 33.01 फीसदी थी। एक महीने बाद 1 अप्रैल को भारत में कोरोना से मृ’त्यदर 28.16 फीसदी थी।
भारत में अब तक कोरोनावायरस के केस कम होने के पीछे की बड़ी वजहें
1- कम टेस्टिंग होना: भारत में अभी तक सिर्फ 85 हजार लोगों का ही कोरोनावायरस टेस्ट हुआ है, यानी एक लाख की आबादी पर सिर्फ 6.5 लोगों का ही टेस्ट हो रहा है
- 130 करोड़ आबादी वाले देश में जिस तरह कोरोना वायरस के लिए स्क्रीनिंग और सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं, वो नाकाफी हैं। भारत में अब तक करीब 85 हजार टेस्ट हो पाए हैं। कुछ राज्यों में अब भी रोजाना-250 से 500 तक टेस्ट ही किया जा रहा है। इसमें एक व्यक्ति के कई टेस्ट होते हैं। इसलिए भी भारत में कोरोना के केस कम आए हैं। भारत में अभी एक लाख की आबादी पर महज 6.5 लोगों की ही टेस्ट हो सका है।
- वहीं, दुनिया के अन्य देशों इसकी स्थिति भारत से उलट है। दक्षिण कोरिया की आबादी महज 5.1 करोड़ है। वहां अब तक 2.5 लाख से अधिक लोगों का टेस्ट किया जा चुका है। एक अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक हर एक लाख की आबादी पर बहरीन ने 20,075 लोगों का, दक्षिण कोरिया ने 8,222 का, इटली ने 8,385 का, ऑस्ट्रिया ने 6,203 का, ब्रिटेन ने 2,109 का, अमेरिका ने 447 का, जापान ने 257 लोगों का कोरोना टेस्ट किया है। चीन ने मार्च के अंत तक कुल 3.20 लाख लोगों का टेस्ट किया था।
2- लॉकडाउन जल्द लागू होना: इस वजह से कोरोनावायरस एक महीने से दूसरे स्टेज में ही बना हुआ है, इसीलिए अभी रोजाना औसतन 500 केस ही सामने आ रहे हैं
- डब्ल्यूएएचओ का कहना है कि भारत सरकार ने सही समय पर लॉकडाउन लागू किया। इसीलिए देश में कोरोना के केस कम आ रहे हैं। भारत में कोरोनावायरस की रफ्तार चीन, अमेरिका ओर यूरोपीय देशों के तुलना में काफी धीमी है।
- 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन तक देश में 374 केस थे। उसके बाद 8 दिनों में करीब 820 केस सामने आए हैं। यानी एक दिन में औसतन 100 केस ही सामने आए। 31 मार्च को 1635 केस थे। 6 अप्रैल को यह संख्या बढ़कर 4778 हो गई। यानी 6 दिन में 3145 केस आए हैं। देश में अब औसतन एक दिन में 500 से ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं।
- एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि भारत में कोरोनावायरस एक महीने से दूसरे स्टेज में ही बना हुआ है, अभी यह तीसरे स्टेज में नहीं पहुंच पाया है। जिसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन का फेज भी कहा जाता है। जबकि अमेरिका में 10 दिन में ही कोरोनावायरस के केस एक हजार से 20 हजार तक पहुंच गए थे।



Input: Dainik Bhaskar



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