बिहार भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी होंगे। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी ने लेटर जारी कर इसकी जानकारी दी है। इसके पहले संजय जायसवाल बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे।
NDA की सरकार टूटने के बाद बीजेपी लगातार सम्राट चौधरी को प्रमोट कर रही है। सबसे पहले इन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में बीजेपी कार्यकर्ताओं का सम्मान बढ़े। और प्रदेश में हमारी सरकार बने, इसकी रणनीति पर काम करेंगे।
बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इन्हें मंच संचालन की जिम्मेदारी दी गई। अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
सम्राट चौधरी पिछले कई दिनों से हर मुद्दे पर सीधे नीतीश कुमार पर हमलावर हैं। उन्हेंने शपथ ली है कि जब तक वो नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से बेदखल नहीं कर देंगे। तब तक वो पगड़ी बांधे रखेंगे। सितंबर में संजय जायसवाल का प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल खत्म हो गया था, लेकिन लगातार 2 विधानसभा उपचुनाव और अमित शाह के दौरे के कारण ये नियुक्ति टल रही थी।
राबड़ी देवी का तंज
सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि बनिया लोग से मन भर गया है। अब महतो से भरना है। बता दें कि इससे पहले संजय जायसवाल के हाथ में बीजेपी की कमान थी। वो वैश्य वर्ग से आते हैं, जबकि सम्राट कुशवाहा समाज से आते हैं।

सम्राट चौधरी लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे थे।
सम्राट कुशवाहा समाज से…3 बार मंत्री रहे
भारतीय जनता पार्टी ने 2024 का लोकसभा चुनाव देखते हुए विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं। बिहार सरकार में तीन बार मंत्री रह चुके हैं। इनके और इनके पिता पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी की बिहार में काफी राजनीतिक पैठ मानी जाती है।
सम्राट चौधरी उस समय विवादों में आए थे, जब लालू यादव की कैबिनेट में सबसे कम उम्र के मंत्री बन गए थे। फिर लंबे बवाल के बाद उन्हें मंत्री पद से हटना पड़ा था।
चौधरी उस समय भी सक्रिय भूमिका में थे, जब राजद को जदयू तोड़ रही थी। कुछ विधायक और एमएलसी लेकर सम्राट चौधरी जदयू में शामिल हो गए थे। बाद में जीतन राम मांझी के कार्यकाल में उन्हें नगर विकास मंत्री बनाया गया था।
इसके बाद सम्राट चौधरी ने जदयू को अलविदा कहकर भाजपा का दामन थामा था। भाजपा ने भी उन्हें इनाम देते हुए राज्यपाल कोटे से एमएलसी बनाया। पंचायती राज मंत्री बनाया। जब भाजपा सरकार से हटी तो उन्हें विधान परिषद में प्रतिपक्ष का नेता बनाया गया।



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