मुजफ्फरपुर में सीएसपी संचालक के हत्या मामले में बुधवार को जेल भेजे गए संदीप कुमार दो साल पूर्व लॉकडाउन में पूर्वी चंपारण के दरमाहा गांव से साहेबगंज आया था। यहां आकर संदीप ने निजी स्कूल खोला था। पुलिस अनुसंधान में यह बातें सामने आई है। स्कूल खुलने के बाद रंजीत की चचेरी भतीजी उस स्कूल में गई थी। वहीं, उसने टीचर की जॉब शुरू कर दी। काम के बीच दोनों में नजदीकियां बढ़ने लगी। दोनों के बीच दोस्ती हो गई। फिर, प्रेम हो गया। दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे। लेकिन, दोनों के रिश्ते की बात रंजीत को पता लग गई। जो उसे नागवार गुजरने लगा। वह दोनों के रिश्ते से नाखुश था। इसको लेकर वह दोनों के बीच आ गया।
विरोध करने पर संदीप के आंखों में वह खटकने लगा। जिसके बाद संदीप ने उसकी हत्या की साजिश रच दी। बैंक खाता खुलवाने के बहाने बुलाया। फिर, सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस जांच में पता चला की स्कूल में सी सी टी वी कैमरा लगा है। जब पुलिस ने कैमरे की जांच की तो कुछ हाथ नहीं आया।
पता चला की सीसीटीवी के हार्ड डिस्क को 10 जनवरी के बाद डिलीट कर दिया गया था। बताते चले की 14 जनवरी को रंजीत गायब हो गया था। 15 जनवरी को उसकी लाश देवरिया इलाके में मिली थी। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच में जुट गई थी। संदीप ने मूवी देखकर साक्ष्य छिपाने का काम किया था। उसने लाश को अलग जगह फेंका। फिर, मोबाइल, स्कूटी, लैपटॉप अलग अलग जगह फेंका। ताकि, पुलिस को शक नही हो। हालांकि, तकनीकी सहायता से पुलिस ने संदीप को पकड़ा। फिर, उसके चालक को पकड़ा। पूछताछ करने पर मामला खुल गया।



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