राज्य के 10 जिलों में 19 जगहाें के जलस्रोतों में यूरेनियम की मात्रा खतरनाक स्तर 30 पीपीबी से अधिक पाई गई है। इसकी जानकारी देते हुए पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता (जल गुणवत्ता, उत्तर बिहार) रामचंद्र पाण्डेय ने सभी जिलों के कार्यपालक अभियंता काे प्रखंडों में इन चिह्नित चापाकलाें के पानी के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने काे कहा है।
जिन चापाकलाें के पानी में 30 पीपीबी से अधिक यूरेनियम मिला है, उसे लाल रंग से रंगवाने, उसके आसपास के चापाकलाें के पानी की नियमित जांच और यूरेनियम की मात्रा का अध्ययन करने काे कहा है। बताया है कि केंद्रीय भूमिगत जल बाेर्ड एवं महावीर कैंसर संस्थान के अध्ययन के बाद इन जगहाें के चापाकलाें के पानी की जांच कराई गई।
उसमें 10 जिलों के 19 जलस्रोतों में यूरेनियम की मात्रा मानक से अधिक पाई गई। इसके बाद उन्होंने इन जलस्रोतों के आसपास के चापाकलाें के पानी की साल में दाे बार जांच कराते हुए उसमें यूरेनियम के स्रोत का पता लगाने काे कहा है।

पानी में रेडियो एक्टिव तत्व का बढ़ना घातक यूरेनियम रेडियो एक्टिव तत्व है। पानी में इसकी मात्रा बढ़ना स्वास्थ्य के लिए घातक है। पानी में मानक से अधिक यूरेनियम मिलने से न केवल मानव जाति, बल्कि पर्यावरण पर भी घातक असर पड़ता है। पीने के पानी में यूरेनियम की मात्रा अधिक होने से किडनी संबंधी खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे पानी का लगातार उपयोग करने से ब्लड प्रेशर, हार्ट की समस्या और हड्डियों के कमजोर होने के साथ-साथ कैंसर तक का खतरा हो सकता है।



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