कोरोना को लेकर हुए लॉकडाउन के कारण एक बेटा अपने पिता को कंधा भी नहीं दे सका। धनघटा क्षेत्र के सिरसा गांव में एक वृद्ध मौ’त हो गई और बेटा गुजरात के सूरत में फंसा हुआ है। बेटे के न पहुंच पाने पर उनके पट्टीदारों ने मिलकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। अब उसका प्रयास है कि वह कर्म के भीतर किसी तरह परिवार के साथ घर पहुंच जाए। इसके लिए शासन से गुहार लगा रहा है।
धनघटा थाना क्षेत्र के सिरसी गांव निवासी वृद्ध उदयराज राय अपनी पत्नी के साथ गांव में रहते हैं। उनका इकलौता पुत्र गुजरात के सूरत में अपने परिवार के साथ रहता है। इसके अलावा पुत्री भी वहीं रहती हैं। उनके परिवार के अनुसार उनकी तबी’यत कुछ वर्षों से खराब चल रही थी। चलने फिरने में असमर्थ थे। 24 मार्च को उनकी तबियत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने जवाब दे दिया तो वृद्ध पत्नी उन्हे लेकर घर आ गई।

इसकी जानकारी होने बाद से ही पुत्र आलोक राय अपने परिवार के साथ घर आने के प्रयास में जुट गए। लेकिन बस, रेल और हवाई सभी सुविधा बंद होने के कारण घर नहीं आ सके। पिता बार-बार पुत्र को बुलाने की बात कहते रहे। लेकिन संभव नहीं हो पाया और शुक्रवार की भोर में उनका नि’धन हो गया। निधन के पास पट्टीदारों ने पहल करते हुए उनका अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन कर्म कैसे होगा यह अभी भी स’मस्या है। वृद्ध मां का घर पर रो-रोकर बुरा हाल है।आलोक राय ने फोन पर बताया कि वे अमरौली (सूरत) में रहते हैं। पूरा परिवार तीन दिन से बिना खाए पिए घर आने के लिए परे’शान है, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं बन पा रही है। आलोक की बहन सुषमा पांडेय भी घर आने के लिए परे’शान हैं। परिवार के सदस्यों का रो-रो’कर बु’रा हाल है।






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