पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में लड़कियों के पैरों में गिरकर वोट मांगते एक प्रत्याशी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। छात्र परिषद के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार दीपांकर प्रकाश ने बातचीत में कहा कि महिलाओं का सम्मान करना उनके लिए गर्व की बात है। मां-बहनों के सामने झुकने में कभी शर्म नहीं करनी चाहिए। महिलाएं मां दुर्गा का अवतार होती हैं
दीपांकर प्रकाश का एक वीडियो सामने आया था इसमें वो वीमेंस कॉलेज के गेट पर कॉलेज से निकलने वाली छात्राओं के पैर पर गिरकर, हाथ जोड़कर अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। पटना के फतुहा के रहने वाले दीपांकर दलित परिवार से आते हैं। पिता एक किसान हैं। वो बड़े सपने लेकर पटना यूनिवर्सिटी पढ़ने आए हैं।
लड़कियों के पैर छूकर वोट मांगने पर पूछे जाने पर दीपांकर ने कहा कि स्त्री मां दुर्गा के समान होती है। उनका पैर छूना तो मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं ऑडी-फॉर्च्यूनर के बिना ही लड़कियों के हक के लिए हमेशा लड़ता रहूंगा। वहीं पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए दिल्ली तक जाकर आंदोलन करूंगा।
पटना साइंस कॉलेज में पढ़ना था सपना
दीपांकर ने बताया कि पिता ने हमेशा उसे आगे बढ़ाने में मदद की। कम आय होने के बाद भी बचपन से ही बेटे को पढ़ाने का सपना था। स्कूल दूर होने की वजह से कंधे पर बिठाकर बेटे को स्कूल छोड़ा करते थे। दीपांकर की पढ़ाई नवोदय स्कूल पटना से हुई है।
दीपांकर कहते हैं कि पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने का सपना मेरे और मेरे पिताजी का बचपन से रहा है। घर दूर होने की वजह से मैं कॉलेज के अंबेडकर हॉस्टल में रहता हूं। यूनिवर्सिटी की परेशानी देखकर हमेशा बदलाव लाने की कोशिश की। अब इस चुनाव के जरिए बदलाव की एक उम्मीद आ गई है।
नॉमिनेशन के 2 घंटे पहले तय हुआ नाम
दीपांकर कहते हैं कि मैंने सोचा भी नही था कि अध्यक्ष पद पर नॉमिनेशन में मेरा नाम जाएगा। नॉमिनेशन से 2 घंटा पहले जाप के छात्रसंघ अध्यक्ष का फोन आया और कहा गया कि फॉर्म में कोई पद मत डालना, क्योंकि तुम अध्यक्ष पद पर लड़ रहे हो। मुझे एक पल के लिए लगा कि मैं सपना देख रहा हूं। खुशी से आंखों से आंसू आने लगे। मैं एक गरीब का बेटा हूं। मैंने दुख अपनी आंखों से देखा है। इसलिए मैं छात्रों का दुख भली-भांति देख पाता हूं। अगर चुनाव में जीत जाता हूं, तब छात्र हित में काम करूंगा।
बचपन से ही लोगों की आवाज बनना चाहा
मैंने बचपन से ही लोगों का आवाज बनना चाहा। जिन लोगों के साथ जुड़ा वह लोग भी हमेशा संघर्ष करते रहते हैं। मैंने भी उन लोगों के साथ जुड़कर स्टूडेंट के लिए कई लड़ाईयां लड़ी। पापा हमेशा कहते हैं कि दलित को टिकट नहीं मिलता, लेकिन मुझे अगर मिला है तो मुझे इसके बदले साबित करना है खुद को। पिता जी का सहयोग भी मेरे साथ है। मां बीमार हैं। फिर भी पिता जी मुझे कह रहे हैं कि तुम्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है। तुम उसको पूरा करो, मां का ध्यान मैं रख लूंगा।



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