वैश्विक महामा’री कोरोना से बचने के लिए देश में संपूर्ण लॉकडाउन कर दिया गया है. इसका मतलब ये है कि जो जहां है वो वहीं रहे. सोशल डिस्टेंस बना रहे और लोगों में कोरोना का सं’क्रमण न हो. इस विकट संकट में बिहार के कई मजदूर हैं जो दूसरे प्रदेशों में काम करते हैं, वे अब अपने घर की ओर लौट रहे हैं. ऐसे ही कई मजदूर आज पटना के मीठापुर बायपास पहुंचे. वे केरल से अपने प्रदेश बिहार पैदल लौट आये हैं, जिन्हे अब समस्तीपुर जाना है. इससे पहले वे ट्रेन से वाराणसी पहुंचे, जहां संपूर्ण लॉकडाउन के बाद उन्हें पटना पैदल आना पड़ा है.आज मीठापुर बाइपास पर पुल के नीचे केरल से आया इन मजदूरों का काफिला भूख से बेहाल समस्तीपुर की ओर रवाना हुआ है.

बिहार तक पहुंचने में उनकी तीन बार जांच हो चुकी है. पटना पहुंचने के बाद इन मजदूरों ने गुहार लगाई है कि फिर एक बार उनकी जांच करा लें प्रशासन, मगर उन्हें उनके घर जाने में मदद करे. काफिले में लगभग 15 लोग हैं. केरल से 21 मार्च को केरल से ये सोचकर निकल लिए कि इस महामारी में रहेंगे कहा, खाएंगे क्या?मजदूर अबुल हुसैन ने बताया कि 21 को केरल से चले. 23 मार्च को झांसी पहुंचे और पता चला कि ट्रेने अब नहीं चलेंगी. जिससे घबरा गए और वहां से पैदल ही रेल ट्रैक से पैदल ही चल दिए. रास्ते में एक हाल्ट से मैजिक वाहन भी मिला. किसी तरह मुग़लसराय पहुंचे. उत्तर प्रदेश पुलिस ने बहुत मदद की. रास्ते भर जितना हो सका खाने – पीने की चीजें दीं. वहां से पैदल ही आज अहले सुबह पटना पहुंचे. लेकिन यहां आकर फंसे हुए हैं. समस्तीपुर जाना है.उन्होंने बताया कि गांव के किसी पहुंच वाले ने पटना के जिलाधिकारी से बात की. जवाब आया कोई गाड़ी आए तो जिलाधिकारी कार्यालय आकर लिखित दे सकते हैं. लेकिन समय ऐसा है कि कोई गाड़ी वाला आने को तैयार नहीं. उनके बीच का ही एक मजदूर ये बताते हुए रोने लगा कि घर कैसे पहुंचे. अब लगता है पहुंच नहीं पाएंगे. यहीं कुछ हो जाएगा.




Input: Livecities



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