भारत-नेपाल के बीच आपसी मित्रता-रिश्तेदारी व प्रेम की कहानी हमेशा सुनने में आती है। सरहदों पर बसे दोनों देश के लोग एक ही नदी किनारे छठ मनाते हैं। एक तरफ भारत के लोग दूसरी तरफ नेपाल के। छठ मईया का गीत भी एक होता है और पूजा पद्धति भी एक ही।
यह जगह है सीतामढ़ी में भारत-नेपाल बॉर्डर पर बहने वाली झीम नदी। सीतामढ़ी के सोनबरसा प्रखंड से लगी सीमा पर यह नदी बहती है। एक घाट भारत के लोग अर्घ्य देते हैं तो दूसरी तरफ नेपाल के लोग। नदी के दोनों किनारे पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। टेंट लगाने के लिए बांस-बल्लियां लगने लगी हैं।
दोनों देशों के छठ व्रती कई दशकों से हजारों की संख्या में इस नदी के दोनों किनारे पर छठ पूजा मनाते आ रहे हैं। उसमें मुख्य रूप से भारत के कई गांव के श्रद्धालुओं के साथ नेपाल के कई गांवों के छठ व्रती इस नदी तट पर आते हैं। झीम नदी घाट पर नियम निष्ठा से लोक आस्था का महा पर्व मनाते हैं। घाट पर भगवान सूर्य की आराधना करते हैं। दोनों देश के लोग सरहद की सीमा को तोड़ एकसाथ मिलकर सूर्य की उपासना करते हैं।

28 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ छठ महावर्व की शुरुआत हो जाएगी।
15 दिन से चल रही विशेष तैयारी
दोनों देशों के छठ व्रती पिछले 15 दिनों से बांस-बल्ला लगाकर घाटों को सजाने में जुटे हुए हैं। भारत और नेपाल के छठ व्रतियों का अर्घ्य दान के लिए लगभग 3 किमी की लंबाई में दो तरफा परिधि में सजावट कार्य पूरा करने में लगे हुए हैं। इस दौरान दोनों ही देश के हजारों श्रद्धालु इस घाट पर जुड़ते हैं। जिम नदी के छठ घाट को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। सभी एक झलक इस छठ घाट को देखने के लिए पूरा बेबस रहते हैं।
नेपाल के मूल निवासियों की भी छठ के प्रति बढ़ रही आस्था
नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में बिहार के रहने वालों के साथ-साथ नेपाल के मूल निवासियों की भी छठ के प्रति आस्था बढ़ती जा रही है। इन्हें प्रत्येक वर्ष छठ पर्व मनाने की विधि-विधान तथा सूर्य देवता की उपासना को देख नेपाली मूल के लोगों में भी धीरे-धीरे आस्था बढ़ रही है।

भारत के कई गांव के लोगों के साथ नेपाल से भी छठ व्रती इस नदी तट पर आते हैं। (फाइल)
30 को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य
देश के साथ दुनियाभर में 28 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ छठ महावर्व की शुरुआत हो जाएगी। 29 अक्टूबर को खरना मनाया जाएगा। 30 को अस्ताचलगामी यानी डूबते हुए सूर्य देव को व्रती अर्घ्य देंगे। और 31 अक्टूबर को उदीयमान यानी उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दे कर छठ व्रत का समापन हो जाएगा।





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