छपरा में पौराणिक और धार्मिक महत्व रखने वाला गौतम स्थान सेमरिया अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। दरअसल छपरा मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर रिविलगंज के गौतमस्थान का पौराणिक काल से विशेष महत्त्व है। पौराणिक काल की कई स्मृतियां सेमरिया से जुड़ी हुई हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौतम ऋषि का आश्रम रिविलगंज के गोदना स्थित सेमरिया सरयु घाट पर ही था, जहां प्रभु राम ने अहिल्या का उद्धार किया था। बक्सर से जनकपुर जाने के क्रम में प्रभु राम का आगमन सेमरिया में हुआ था। जिनके पद चिन्ह आज भी मंदिर में मौजूद है। पौराणिक काल से जुड़ी कई स्मृतियां आज भी यहां विराजमान है।

लोग प्यार से बजरंगबली को बुलाते हैं बुढऊ
राम सर्किट से नहीं जोड़ने से लोगों मे मायूसी
केंद्र सरकार के महत्वकांक्षी योजना राम सर्किट में सेमरिया को नही जोड़े जाने से स्थानीय लोगो मे मायूसी है। अयोध्या से जनकपुर तक राम से सम्बंधित जगहों को जोड़ने के प्रयास किया गया है, लेकिन सेमरिया गौतम स्थान इससे अछूता रह गया है। इसके लिए स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार सदन में आवाज बुलंद किया गया। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा इसको शामिल किये जाने को लेकर आश्वासन मिला है। वहीं सेमरिया में कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान मेला लगता है, जिसमे देश के कई हिस्सों से लोग आते हैं। सेमरिया का गंगा स्नान मेला 1 महीने तक लगता है।
लोग प्यार से बुलाते हैं बुढऊ
रिविलगंज गोदना सेमरिया से एक और मान्यता जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा अनुसार बजरंगबली का ननिहाल गोदना सेमरिया में माना जाता है। यहाँ के स्थानीय लोग बजरंग बली को भगिना का दर्जा देते हुए आज भी ‘बुढऊ’ के नाम से सम्बोधित करते हैं। गौतम ऋषि के पुत्री माता अंजनी गौतम स्थान गोदना में निवास करती थी।

राम सर्किट से अछूता रह गया है सेमरिया
2050 तक मूर्ति निर्माण का टेंडर बुक
नवरात्र के समय रिविलगंज गोदना में प्रसिद्ध झंडा मेला का आयोजन किया जाता है। यहां पूर्वांचल के सबसे बड़े बजरंग बली आखाड़ा मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में बनने वाले प्रसिद्ध हनुमान जी “बुढऊ” के मूर्ति निर्माण के लिए आगामी 2050 तक अग्रिम बुकिंग हो चुका है। मूर्ति निर्माण के लिए लोग मन्नत रखते हैं, मन्नत पुरा होने के बाद मूर्ति का निर्माण कराया जाता है, जिसके लिए आयोजन समिति द्वारा निर्माण वर्ष का समय आवंटित किया जाता है।
नर्तकियों के साथ होती है विदाई की रस्म
गोदना सेमरिया में झंडा मेला पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है, यहां लगातार 24 घंटे का जुलूस निकालकर भगिना हनुमान “बुढऊ” को विदाई करने का रस्म किया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि मेले के दौरान मूर्ति के सामने नर्तकियों का नृत्य कराया जाता है। सैकड़ो साल पुराने रस्म के अनुसार ठाकुरबाड़ी में मूर्ति के सामने नर्तकियों का नृत्य होता है। हालांकि आधुनिकता के दौर में नर्तकियों का स्थान आर्केस्ट्रा की बार बालाओं ने ले लिया है।





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