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अस्पताल में महिलाओं के ठहराव की नहीं है कोई व्यवस्था:एसएनसीयू में फर्श पर मरीज, अस्पताल प्रशासन ने कहा- जल्द होगी व्यवस्था

सुपौल सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू में प्रसूताओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इससे प्रसव के बाद प्रसूताओं को खासी फजीहत झेलनी पड़ रही है। दरअसल सदर अस्पताल में भर्ती अधिकांश महिला के अस्वस्थ बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है। लेकिन, वहां भर्ती नवजात को भूख लगने पर माता द्वारा बच्चे को स्तनपान कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

फर्श पर ही रहना पड़ता है

प्रसूता के रूकने का कोई इंतजाम नहीं है। इधर, प्रसव के बाद माताओं को सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष के बाहर कर दिया जाता है। ऐसे में जब अस्वस्थ नवजात बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती कराया जाता है तो नवजात की माताओं को सदर बेड उपलब्ध नहीं कराए जाने से उन्हें अस्पताल के फर्श पर दिन एवं रात काटना पड़ रहा है। वहीं नवजात एवं प्रसूता की देखभाल के लिए रुके परिजनों को भी सदर अस्पताल में इधर-उधर भटकना पड़ता है।

शुद्ध पेयजल भी उपलब्ध नहीं

यहां पीने का शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। इसको लेकर सदर अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती नवजात के सरायगढ-भपटियाही प्रखंड अंतर्गत मुरली निवासी माता प्रभा देवी एवं पिता राहुल कुमार सिंह ने कहा कि गुरूवार को बच्चे का जन्म भपटियाही सीएचसी में हुअ था। यहां जन्म के बाद बच्चे को सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। इसके बाद रेफर किए जाने पर उसे सदर अस्पताल लेकर आए। यहां एसएनसीयू में उसका इलाज चल रहा है।

एसएनसीयू में भर्ती कराया गया

लेकिन, सदर अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था के अभाव में बच्चे की देखभाल के लिए रूक माता-पिता को अस्पताल के फर्श पर रात गुजारनी पड़ रही है। वहीं सदर प्रखंड अंतर्गत बेला पूनर्वास निवासी 20 वर्षीय शाहीन परवीन ने कहा कि उनके बच्चे का भी जन्म गुरूवार को ही हुआ था।

जन्म के बाद बच्चा नर्वस हो गया। जिसे सदर अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया। लेकिन कोई प्रबंध नही होने से बच्चे को दूध पिलाने से लेकर रहने तक में फजीहत झेलनी पड़ रही है। ऐसी ही समस्या वहां मौजूद अन्य प्रसूताओं ने भी बतायी।

इसको लेकर अस्पताल प्रबंधक अभिलाष वर्मा ने कहा कि अभी ये सुविधाएं नही है। बीते दिनों डीएम के निरीक्षण में भी ये बातें सामने आई। जिसके बाद डीएम ने अविलंब इन समस्याओं को दूर करने को कहा है। जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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