गया में पितृ पक्ष मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान बीते 6 दिनों में करीब 3 लाख पिंडदानी गया पहुंच चुके हैं। ऐसे में यहां अब तक करीब 70 करोड़ का कारोबार हो चुका है। यह कहना है सेंट्रल बिहार चैंबर ऑफ कार्मस। उम्मीद यह भी की जा रही है कि अगर ऐसा ही रहा तो यह कारोबार 25 सितंबर तक 300 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
पितृ पक्ष मेले में होटल से लेकर फूल व्यवसायी और पूजन सामग्रियों के दुकानदारों की चांदी है। बड़ी संख्या में पिडदानियों का आने का सिलसिला हर दिन बना हुआ है। स्टेशन से लेकर विष्णुपद मंदिर और बोधगया तक पिंडदानी ही नजर आ रहे हैं। जिला प्रशासन और विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति का कहना है बीते छह दिनों में करीब 3 लाख पिंडदानी गया में कदम रख चुके हैं। इससे यहां के कारोबार को पंख लगे हैं। बीत छह दिनों में ही करीब 70 करोड़ का कारोबार हो चुका है। पिंडदानियों के आने का सिलसिला इसी तरह बरकरार रहा तो अगले 10 दिन में यह करोबार 300 करोड़ के करीब पहुंच जाएगा।
सेंट्रल बिहार चैंबर ऑफ कार्मस का कहना है कि सामान्य व्यक्ति कम से कम 3 हजार रुपए पिंडदान के निमित्त खर्च करता ही है। इससे बड़े वर्ग की बात अलग है। वह लाखों रुपये खर्च कर चले जाते हैं या फिर जो 17 दिनों की पूजा के लिए गया आते हैं वे तो लाखों रुपए शहर को दे कर चले जाते हैं।

फूल कारोबारी बिक्री से खुश हैं।
न्यूनतम खर्च
- पंडा जी- 1100 न्यून्तम
- पूजन सामग्री- दूध, दही, घी, शहद, अगरबत्ती, जौ का आटा, तिल, गुड़, धूपबत्ती, कपूर, रुई, मिट्टी के दीपक, रोली, चंदन, यज्ञोपवित, नारियल, सफेद व लाल कपड़ा, अक्षत, पान के पत्ते: 500-1000 रुपए
- फल-फूल, मिठाई:- 400 रुपए
- एक दिन के तीन टाइम के खाना का खर्च:- 400-500 रुपए
- धोती, गमछा, साड़ी, गंजी:- 500 रुपए
- दान के बर्तन, लोटा, एक प्लेट:- 250 रुपए

सरकारी व्यवस्था के तहत ठहर रहे हैं तो कोई खर्च नहीं है। आप निजी होटल में रह रहे हैं तो यह खर्च अलग है। क्योंकि एक होटल के डबल बेड कमरे का एक दिन का किराया न्यनूतम 2500 रुपए है। यह अधिकतम 4500-5500 रुपए है।
इधर, बर्तन कारोबारी पिंटू मालाकार का कहना है कि बीते छह दिनों से बाजार अच्छा है। सामान बिक रहा है। अच्छा बिजनेस हो रहा है। वहीं, फूल विक्रेता रोशन का कहना है कि कारोबार अच्छा चल रहा है। एक सामान्य माला व कुछ फूल 10 रुपए में बेच रहे हैं। इससे अधिक या फिर कुछ विशेष फूल लेने पर कीमत बढ़ जाती है। कोई भी पिंडदानी 5 माला से कम नहीं खरीदता है।
वहीं, विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल बिठ्ठल का कहना है कि बीते दो वर्ष से कोरोना की वजह से पिंडदानी न के बराबर आए थे। इस बार पिंडदानी आ रहे हैं। अभी और भी आएंगे। दान के संबंध में उन्होंने कहा- दान कोई 500 से दे रहा है तो कोई हजारों रुपये भी देर रहा है। यह कहा नहीं जा सकता है। यह श्रद्धा की चीज है कि लोग अपने पितरों के नाम पर कितना दान कर सकते हैं। दान से अधिक श्रद्धा का महत्व है।






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