कोरोना सं’क्रमण रोकने के लिए सफाई पर जोर देते हुए शहरी विकास विभाग ने सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी फैलाने वालों पर एंटी लिटरिंग एंटी स्पिटिंग एक्ट के तहत का’र्रवाई के निर्देश दिए हैं। एक्ट के तहत दो’षी पाए जाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये तक और छह महीने की सजा का भी प्रावधान है। प्रदेश में 2016 से एंटी लिटरिंग, एंटी स्पिटिंग ऐक्ट लागू है। इसके तहत सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी फैलाने वालों पर सख्ती का प्रावधान है, लेकिन निकायों में इस पर कभी गं’भीरता से अमल नहीं हुआ। अब कोरोना से निपटने के लिए शहरी विकास निदेशालय ने सभी निकायों को एक्ट के तहत का’र्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इसके तहत मुख्य नगर अधिकारी, सहायक नगर अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी, सफाई निरीक्षक के साथ ही पुलिस को भी गंदगी फैलाने वाले व्यक्ति का चालान करने का अधिकार दिया गया है। दोषी पाए जाने पर अधिकतम पांच हजार जुर्माना या छह महीने की सजा का प्रावधान है, दोनों सजा एक साथ दी जा सकती है। गंदगी की श्रेणी : धूल, मिट्टी, कागज, पशु शव, मानव- पशु मल मू’त्र, पत्ते, घास, थूकना आदि। निदेशक विकास वीके सुमन के मुताबिक निकाय कोरोना से निपटने के लिए 14वें वित्त आयोग या बोर्ड बजट का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिन निकायों को इन मदों में बजट नहीं है वो आपदा मद से बजट की मांग कर सकते हैं। सुमन ने बताया कि गुरुवार को 2017 अतिरिक्त कर्मियों को सफाई में लगाया गया। 6535 मास्क वितरित किए गए।
सभी सार्वजनिक शौचालयों, पेट्रोल पम्प, व्यावसायिक कॉम्पलेक्स में वॉशबेसिन उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसकी सूचना भी बोर्ड लगाकर देनी होगी। इस समय सबकी प्राथमिकता कोरोना रोकथाम है, सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए।
वीके सुमन, निदेशक शहरी विकास





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