सात साल के लंबे इंतजार के बाद निर्भया को आखिरकार इंसाफ मिल गया है। निर्भया मामले के चारों दो’षियों को दिल्ली की तिहाड़ ज’ले में शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे फां’सी पर लटका दिया गया। मेडिकल ऑफिसर ने चारों दो’षियों को मृ’त घोषित किया।
निर्भया के चार दो’षियों को फां’सी पर चढ़ाकर मेरठ का पवन ज’ल्लाद अपने दादा कालूराम का रि’कॉर्ड तो’ड़ दिया है। कालूराम ने एकसाथ दो दो’षियों को फां’सी दी थी जबकि पवन ने आज एक साथ चार दो’षियों को फां’सी पर लटकाया है। पवन ऐसे परिवार का सदस्य है जिसकी चार पीढ़ियां फां’सी देती आ रही हैं। पवन के परदादा लक्ष्मणराम अपने परिवार में ज’ल्लाद का काम करने वाले पहले शख्स थे। तब देश में अंग्रेजी हुकूमत थी।

दिल्ली के जीसस मेरी कॉलेज की स्टूडेंट्स गीता चौपड़ा व उनके भाई संजय चौपड़ा की ह’त्या करने वाले कुख्यात अ’पराधी रंगा-बिल्ला को लक्ष्मणराम के बेटे कालूराम ने फां’सी पर लटकाया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ह’त्यारे सतवंत सिंह और षड़’यंत्र रचने वाले केहर सिंह को भी कालूराम ने फां’सी पर चढ़ाया था।कालूराम ने बाद में यह काम बेटे मम्मू सिंह को सौंप दिया। मम्मू ने आखिरी बार साल-1997 में जबलपुर के कांताप्रसाद तिवारी को फां’सी दी थी। मम्मू की मौ’त से पहले ही दादा कालूराम ने पौत्र पवन को ज’ल्लाद के लिए तैयार कर लिया था। पवन ने बताया कि उसके दादा ने एकसाथ दो लोगों को फां’सी पर लटकाया था, लेकिन वह चार दोषियों को एकसाथ फांसी देकर यह रिकॉर्ड तो’ड़ेगा। 58 साल के पवन बताते हैं कि पहली बार वह आगरा जेल में 1988 में गए थे। उस वक्त रे’प के आ’रोपी जुम्मन को फां’सी देने उसके दादा गए थे।





Leave a Reply