ओडिशा के जाजपुर की रहनेवाली अमृता साहू के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। इनके पास बेटी काे पढ़ाने के लिए पैसे नहीं थे। जिंदगी फाउंडेशन ने अमृता काे नीट की तैयारी कराने की जिम्मेदारी ली।
उसने अब 636 अंक हासिल कर परीक्षा पास कर ली है। कुछ ऐसी ही कहानी केंद्रपाड़ा जिले के निवासी जगन्नाथ गिरि की है। इनके पिता भूमिहीन किसान हैं। पिता के साथ जगन्नाथ भी खेतों में काम करते थे, लेकिन उनकी तमन्ना पढ़-लिखकर डॉक्टर बनने की थी।
इनका जीवन भी जिंदगी फाउंडेशन ने बदल दिया। जगन्नाथ ने मेडिकल की तैयारी की और नीट में 635 अंक लाकर अब डॉक्टर बनने की राह पर हैं। ढेंकानाल के मलय कुमार प्रधान के पिता भी मजदूर हैं। गरीबी से लड़कर इन्होंने नीट में सफलता पाई है। अमृता, जगन्नाथ और मलय जैसे कितनों का जीवन जिंदगी फाउंडेशन ने बदला है। हाेनहाराें की सफलता पर ओडिशा के राज्यपाल गणेशी लाल ने इनसे मुलाकात की।
राज्यपाल ने यह भी आश्वासन दिया कि जब भी किसी मदद की जरूरत होगी, वे इन मेधावी छात्रों की शिक्षा सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश करेंगे। जिंदगी फाउंडेशन के 21 में से 20 छात्रों ने नीट-2022 में क्वालिफाई किया है। 2017-18 से लेकर अब तक जिंदगी फाउंडेशन के 90 छात्रों ने नीट के लिए क्वालिफाई किया है।
ये सभी समाज के गरीब और पिछड़े तबके से आते हैं, जिनके परिवार मुश्किल से गुजारा कर पाते हैं। जिंदगी फाउंडेशन ने इन बच्चों को नीट की कोचिंग, स्टडी मेटेरियल, रहने-खाने और अन्य सभी सुविधाएं मुफ्त में दी।
साल 2021-22 में अपनी सफलता के 5 साल पूरे होने पर, जिंदगी फाउंडेशन अब ओडिशा के बाहर भी काम करने की तैयारी कर रहा है। दूसरे राज्यों के बच्चे भी इस फाउंडेशन के तहत नीट की तैयारी कर सकेंगे। जिंदगी फाउंडेशन की कल्पना शिक्षाविद् अजय बहादुर सिंह ने की थी।



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