बाढ की समाप्ति के बाद बाढ से पीड़ितों ने अब राहत की सांस तो ली, लेकिन कई स्थानों पर तबाही का मंजर भी देखने को मिल रहा है। कुछ ऐसा ही नजारा घोरघट उच्च विद्यालय के समीप देखने को मिला। जहां मनी नदी के किनारे मौजूद उच्च विद्यालय घोरघट पर कटाव का खतरा बना हुआ है। जिसे रोकने के लिए किए गए कटाव रोधी कार्य का जिओ बैग भी ध्वस्त होकर पानी में बह गया है। ऐसी स्थिति में आसपास के ग्रामीण कटाव के खतरे से सहमे हुए हैं। उक्त स्थल के ग्रामीण धीरज पासवान, अमीर पासवान, राज किशोर पासवान आदि ने बताया कि पिछले 2 साल पूर्व उच्च विद्यालय घोरघट एवं आसपास के गांव के घर को बचाने के लिए लाखों की लागत से उच्च विद्यालय घोरघट के समीप मनी नदी पर कटाव रोधी कार्य के तहत जिओ बैग बिठाया गया था। जो पहली बाढ में ही जियो बैग ध्वस्त हो गया था।
जियो बैग को लेकर ग्रामीणों ने विभाग को कराया था अवगत
पहली बाढ़ का पानी निकलने के बाद ध्वस्त जिओ बैग को दुरुस्त कराने को लेकर विभाग को स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा जानकारी उपलब्ध कराते हुए अवगत कराया गया था। लेकिन विभाग ने उक्त स्थल पर ध्वस्त हो चुके जिओ पैक को दुरुस्त कराना जरूरी नहीं समझा। अब आलम यह है कि उक्त स्थल पर जियो बैग इस बाढ़ में ध्वस्त होकर पानी में चला गया हैं। मनी नदी पर हो रहे कटाव के कारण आसपास के कई घर नदी में समाने को आतुर है। जिओ बैग के ध्वस्त होने के बाद कटाव के खतरे से सहमे ग्रामीणों ने कहा कि अगर उक्त स्थल पर कटाव का यही सिलसिला जारी रहा तो गांव के घर तो कटकर नदी में समाएंगे ही विद्यालय पर भी कटाव का खतरा बना हुआ है। अगर विद्यालय नदी में कटकर समा जाता हैं तो गांव के बच्चों को उच्च शिक्षा पर प्रभाव पड़ेगा। बड़ी संख्या में आसपास गांव के उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र एवं छात्रा घोरघट उच्च विद्यालय में ही शिक्षा ग्रहण करते हैं।
संवेदनक मानक के अनुरूप नही किए कार्य
ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय को बचाने के लिए ही 2 वर्ष पूर्व कटाव रोधी कार्य के तहत जियो बैग बिछाया गया था। लेकिन संवेदक के द्वारा मानक के अनुरूप कार्य नहीं करने के कारण कटाव रोधी कार्य का जियो बैग पहली बाढ में ही ध्वस्त होकर नदी में समा गया। जिसकी जानकारी विभाग को स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा भी उपलब्ध कराई गई। लेकिन विभाग ने जिओ बैक को दुरुस्त कराना तो दूर स्थल का निरीक्षण तक करने नहीं पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा कि अगर अविलंब उक्त स्थल पर जियो बैग के ढलान के हिसाब से नहीं बिछाया गया तो आसपास के गांव के घर कभी भी नदी के चपेट में आ जाएंगे। साथ ही विद्यालय पर भी कटाव का खतरा बना रहेगा। ऐसे में अधिकारियों से ग्रामीणों ने मांग की है कि स्थल का निरीक्षण कर ध्वस्त हो चुके जियो बैग को ढलान के हिसाब से दुरुस्त कराया जाए।



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