आदिवासी मूल की महिला राष्ट्रपति बनी द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए पैदल निकले दो बंगाली युवक शनिवार को गोपालगंज पहुंचे। इस दौरान दोनों ने अपने हाथों में तिरंगा लेकर गोपालगंज के सड़कों पर पैदल चलते नजर आए। शहर के अम्बेडक चौक के पास शनिवार देर रात पहुंचे युवकों द्वारा रोजाना 45 से 50 किलोमीटर की सफर तय किया जाता। शनिवार को उनका 13वां दिन था। ऐसे में 35 वें दिन दोनों दिल्ली के राजभवन पहुंचेंगे।/
दरअसल, पद यात्रा में शामिल युवक पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी निवासी पिलातुस ओरन व श्याम उरांव है। दोनों चाय बागान में मजदूरी करते है। पिछले 28 अगस्त को ओडलाबाड़ी से पद यात्रा की शुरुआत की। और 13वें दिन गोपालगंज पहुंचे।
इस संदर्भ में दोनों ने बताया कि 35 दिनों में दिल्ली के राजभवन पहुंचने का लक्ष्य है। हमारे द्वारा करीब 15 सौ की यात्रा पैदल ही पूरा करने के लिए रोजाना 45 से 50 किलो मीटर की सफर तय किया जाता। रात में हम पेट्रोल पंप पर विश्राम करते है। ताकि हमे सुरक्षा मिल सकें।
युवकों ने बताया की पहली बार आदिवासी मूल की महिला राष्ट्रपति बनी है, और उन्हें यह विश्वास है की मजदूरों व गरीबों के लिए जरूर कुछ करेगी साथ ही द्रोपदी मुर्मू को सम्मानित करने के लिए पूरे वेस्ट बंगाल के तरफ से पदयात्रा की शुरुआत की गई। 28 अगस्त से शुरू हुई पदयात्रा सितंबर के 22 तारीख को राजभवन पहुंचेंगे। जहां राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को वेस्ट बंगाल की तरफ से सम्मानित किया जाएगा। इसके बाद कुछ मांग पत्र सौंपा जाएगा उन्होंने बताया कि चाय बागान के मजदूरों का पट्टा की मांग के अलावा पश्चिम बंगाल में हिंदी स्कूल होने के बाद सिर्फ बंगाली और नेपाली का प्रमाण पत्र मांगा जाता है, इसके लिए हिंदी को भी शामिल करने की मांग की जाएगी
इसके अलावा बिरसा मुंडा की सटीक मूर्ति कहीं नहीं लगाई गई है उनके सटीक मूर्ति लगे।उन्हें यह विश्वास है कि द्रोपति मुर्मू उनकी बातों को जरूर मानेगी और उनकी मांगों को पूरा करेगी



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