कोरोना के बाद अब नई मुसीबत आ गई है। सामान्य सर्दी-बुखार में भी दम फूलने लगा है। हालांकि, कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। डॉक्टर भी इस नई समस्या से हैरान हैं। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में हर दिन ऐसे 200 से 250 मरीज पहुंच रहे हैं। पटना मेडिकल कॉलेज और प्राइवेट अस्पतालों की बात करें तो यह संख्या एक हजार से भी अधिक है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के पहले सर्दी-बुखार के मरीज 3 दिन में घर में ही ठीक हो जाते थे, अब उन्हें हॉस्पिटल आना पड़ रहा है। डॉक्टर इस समस्या के 5 कारण बता रहे हैं, इसके साथ ही स्टडी भी चल रही है।
जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के श्वसन रोग विभाग के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट डॉ मनीष शंकर का कहना है कि सर्दी के मरीजों में नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। सर्दी-खांसी और बुखार के मरीजों में पहले दम फूलने की समस्या नहीं होती थी, लेकिन अब ऐसी समस्या के साथ मरीज आ रहे हैं। कोरोना के बाद यह देखा जा रहा है। पहली बार ही ऐसा हो रहा है। डॉ मनीष शंकर का कहना है कि पहले सांस के रोगियों में ही सर्दी बुखार या फिर मौसम बदलने पर ऐसा साइड इफेक्ट देखा जा रहा था, लेकिन अब ऐसे मरीजों की संख्या आम हो गई है।
डॉक्टरों ने बताए 5 बड़ कारण
कोरोना के बाद पहली बार सर्दी के मरीजों में जो ट्रेंड सामने आया है, उसके अनुसार अब सांस की तकलीफ अधिक है। हालांकि इससे कोई मौत नहीं हो रही है, लेकिन समस्या को लेकर लोग परेशान हो रहे हैं। कोरोना के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जिससे यह साफ है कि यह वायरस का ही साइड इफेक्ट है। हालांकि, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के श्वसन रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ मनीष शंकर इसके पीछे 5 कारण बता रहे हैं।
कारण एक: काेराेना का साइड इफेक्ट
एक्सपर्ट का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर में बिहार में कम्युनिटी स्प्रेड हो गया था। इस दौरान अधिक संख्या में लोग कोरोना संक्रमित हुए थे, इसमें किसी को लक्षण था, तो कोई बिना लक्षण के ही संक्रमित हुआ। इसमें लोगों के लंग्स पर साइड इफेक्ट हुआ है। ऐसे में जिनके फेफड़े कमजोर हुए उनके साथ सामान्य सर्दी भी भारी पड़ रही है।
कारण दो : कोरोना का खौफ
डॉ मनीष शंकर का कहना है कि कोरोना के कारण लोगों में काफी दहशत है। इस कारण से लोगों में डर है। इस डर से भी वह भागकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि लोग कोरोना का आशंका में पहुंच रहे हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।
कारण तीन : मौसम का बदलाव बड़ा कारण
डॉक्टरों का कहना है कि मौसम का बदलाव बड़ा कारण है। इस बार बारिश कम हुई है, कभी-कभी बारिश हो रही है। इस कारण समस्या हो रही है। यह भी एक कारण हो सकता है। डॉक्टर मनीष शंकर का कहना है कि अभी तो मरीजों से बातचीत में जो बातें सामने आई हैं, उसमें एक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है।


कारण चार : इम्यूनिटी का कमजोर होना
कोरोना के बाद से लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो गई है। यह भी एक बड़ा कारण हो सकता है। कोरोना के बाद लोगों में जागरुकता तो आई है, लेकिन इम्यूनिटी को लेकर लोग पूरी तरह से गंभीर नहीं हैं। इस कारण से जो कोरोना से संक्रमित हुए थे उन्हें इसकी समस्या हो रही है।
कारण पांच : बिहार में बढ़ता वायु प्रदूषण
बिहार में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। बरसात का मौसम चल रहा है, लेकिन बारिश नहीं हो रही है। इस कारण से प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। हवा में उड़ रहे कण से लोगों को परेशानी हो रही है। ऐसी स्थिति में जो कोरोना से संक्रमित हुए हैं, उनके फेफड़े पर प्रदूषण का साइड इफेक्ट दिखा दे रहा है।

एक्सपर्ट व्यू :
IGIMS के श्वसन रोग विभाग में श्वास से संबंधित रोगियों को विशेष ओपीडी चलाई जा रही है। सर्दी खांसी और बुखार के साथ सांस फूलने की समस्या वाले मरीजों को जागरुक करने के साथ उनपर स्टडी भी हो रही है।
डॉ मनीष मंडल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, IGIMS




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