स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के आगमन को लेकर शुक्रवार को एसकेएमसीएच में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य का बिहार मेडिकल सर्विसेस एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) के अधिकारी ने जायजा लिया। इसके बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. बाबू साहब झा और अस्पताल प्रबंधक संजय कुमार साह के साथ जीर्णोद्धार कार्य की समीक्षा की।
इसमें अधीक्षक ने काम में विलंब होने की जानकारी देने के साथ गुणवत्ता मामले से अवगत कराया। अधीक्षक ने बताया कि 27 करोड़ की लागत से अस्पताल का जीर्णोद्धार कार्य हो रहा है। लेकिन, कार्य संतोषजनक नहीं हो रहा है। दो वर्ष में एक ओर का भी कार्य पूरा नहीं हो सका।
काम की गुणवत्ता भी सही नहीं है। जो भी निर्माण हुआ है, वह डैमेज होना शुरू हो गया है। इनडोर वार्डों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति अबतक नहीं हो सकी है। महंगे उपकरण इंस्टॉल होने के बाद भी मरीजों की जांच व एक्स-रे के काम नहीं आ रहे हैं। कई उपकरणों का उपयोग नहीं होने के कारण उसके मेंटेनेंस की डेडलाइन भी समाप्त हो गई। इन सभी मामलों से बीएमएसआईसीएल के प्रसून तिवारी और संवेदक को अवगत कराया गया है।
प्रसून्न तिवारी से मंत्री के आगमन के पूर्व नवनिर्मित रजिस्ट्रेशन काउंटर और ओपीडी के आगे शेड लगवाने को कहा गया है। वहीं, एक्स-रे डिपार्टमेंट को ठीक-ठाक व अन्य कार्यों को दुरुस्त करवाने को कहा गया है ताकि मंत्री से उद्घाटन करवाया जा सके। अधीक्षक ने बताया है कि पूर्व में मंत्री को अस्पताल के जीर्णोद्धार के कार्यों से अवगत कराया जा चुका है। 20 अगस्त के बाद मंत्री एसकेएमसीएच का जायजा लेने आ सकते हैं। जीर्णोद्धार कार्य की फोटोग्राफी भी मंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
जीर्णोद्धार के कार्यों के पेच में फंसा है मॉडल ब्लड बैंक का काम
एसकेएमसीएच परिसर में कैंसर हॉस्पिटल स्थापित होने के बाद परिसर में संचालित ब्लड बैंक को मॉडल ब्लड बैंक के रूप में विकसित किया जाना है। लेकिन जीर्णोद्धार के कार्यों में विलंब होने के कारण मॉडल ब्लड बैंक विकसित नहीं हो सका है। कैंसर हॉस्पिटल के डॉ. रविकांत सिंह ने मॉडल ब्लड के शुरू नहीं होने लिए बीएमएसआईसीएल के स्थानीय पदाधिकारी और संवेदक को जिम्मेवार बताया है। कहा कि स्थानीय प्रशासन रूचि दिखाता तो मॉडल ब्लड बैंक अबतक शुरू हो जाता।







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