देवी-देवताओं को लगाए जाने वाले छप्पन भोग की तर्ज पर शहर के नागदह स्थित गौ मंदिर में गौ माता के लिए छप्पन भोग लगाया गया। अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन बेगूसराय शाखा द्वारा यह 56 भोग लगाया गया। इसको लेकर संस्था के सदस्यों ने बताया कि हमारी गौ माता में 36 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है।
अभी तक हम सभी भगवान के ही छप्पन भोग के बारे में जानते थे। यह पहला अवसर है जब किसी गौशाला में गौ माता के लिए छप्पन भोग लगाया गया। छप्पन भोग में गाय के खाने के लिए हरा चारा, भूसा चोकर, अनाज, फल,सब्जी, फूल, मेवा,मिष्ठान के कुल 56 प्रकार के खाने का व्यंजन तैयार किया था। इस संबंध में महिला सम्मेलन के अध्यक्ष अनु अग्रवाल ने बताया कि हम सभी हमेशा सवामणी (सवा मन अनाज)गौ माता की करते थे। इस बार हम लोगों ने सोचा क्यों न छप्पन भोग किया जाए। एक नई पहल के तहत इस बार गौ छप्पन भोग कार्यक्रम किया। जिसमें संस्था से जुड़ी कई महिलाओं ने मिलकर उक्त कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें 60 से अधिक गौ माता और उनके बछड़े अपने हाथों से छप्पन भोग लगाया। ज्ञात हो कि सबसे पहले गो मंदिर परिसर में एक साथ महिलाओं ने अपने हाथों में आरती की थाली लेकर गौ माता की सामूहिक आरती की। इसके बाद उनकी पूजा-अर्चना की गई। पूजा समाप्त होने के बाद वह मंदिर परिसर में सभी गौ माता को सामूहिक रूप से छप्पन भोग कराया गया । कार्यक्रम के दौरान देसी गाय के महत्व के बारे में भी चर्चा की गई। साथ ही वह मंदिर परिसर में मिलने वाले उत्पादों के बारे में भी उपस्थित लोगों को जानकारी दी गई। अतुल अग्रवाल ने बताया कि देसी गाय हर मायने में विदेशी गाय की तुलना में बेहतर है। उन्हें बताएं कि देसी गाय का दूध और एकता के साथ साथ काफी गुणकारी होता है देसी गाय के रखरखाव में भी काफी कम खर्च होता है या गाय कम बीमार पड़ती है और किसी भी वातावरण में खुद को ढालने में काफी अनुकूल होती है।



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