Breaking News

नागपंचमी के दिन बगहा में निकलता है सोने का झंडा, 121 वर्षों से चली आ रही परंपरा

बगहा के पतिलार में हर वर्ष नाग पंचमी के दिन संपन्न होने वाले महावीरी झंडा मेले का अन्य सभी धार्मिक उत्सवों से ज्यादा पौराणिक महत्ता है। इसका खास वजह है कि यहां पर आने वाला झंडा में सोने का झंडा शामिल होता है। इस सोने के झंडा को देखने के लिए करीब 30 गांवों के लोग झंडे के साथ मेले में शामिल होते हैं। मेले में महिला व पुरूष श्रद्धालु इकट्ठे होते हैं। इस मेल की पौराणिकता लगभग 121 वर्ष पुरानी है। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान हिंदू धर्म के आस्थावानों को अपने धार्मिक कार्यक्रमों को संचालित करना कठिन हो रहा था। उस समय माता बहुरहीया का मंदिर निर्जन स्थान पर था । क्षेत्रीय लोगों ने जमीदार तपेसर लाल के अगुवाई में माता के स्थान पर झंडा निकलने की तैयारी शुरू हुई। जमींदार तपेसर लाल ने सोने का झंडा बनवाकर नाग पंचमी के दिन झंडे के मेले का आयोजन किया।

700 रुपए में 6 महीने में बना झंडा

झंडा बनाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ जमींदार झंडा बनवाने के लिए बनारस पहुंचे। वहीं पर सोने की झंडा बनवाई गई। बनाने के लिए 6 माह का समय लगा, और उस समय 7 सौ रुपया खर्च हुआ। बताया जाता कि नाग पंचमी के दिन झंडे को किसी भी हालत में जमीन पर लिटाया नहीं जा सकता है और न ही तिरछा रखा जा सकता है।

पहले निकलता है सोने का झंडा

यहां पहले सोने का झंडा निकलता है, उसके पीछे डेढ़ से 2 सौ झंडे निकाले जाते हैं। सोने के झंडे का वजन 5 से 6 किलो का है। झंडा निकालने के लिए थाना से भी अनुमति लेनी पड़ती है। झंडा के सुरक्षा में पुलिस बल के जवान तैनात रहते हैं।

झंडे के मेंटेन करने के लिए 33 एकड़ जमीन

जमींदार परिवार के राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि झंडे को हर साल मेंटेन करने के लिए 33 एकड़ जमीन रखा गया है। उसी से उसको मेंटेन किया जाता है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.