बिहार के तमाम विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक अराजकता से बिहार की छवि को धक्का लग रहा है। ज्यादातर विश्वविद्यालयों में सत्र अनियमित हो गए हैं। पिछले दिनों मुजफ्फरपुर के नीतीश्वर कॉलेज के हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ललन कुमार से जुड़े मामले का चाहे जितना मजाक उड़ा लेकिन उसी के साथ मूलभूत समस्याओं की कलई भी खुली। कई विश्वविद्यालयों में विभिन्न छात्र संगठनों का आंदोलन सत्र को नियमित करने, कुलपति की उपस्थिति सुनिश्चित होने आदि अलग-अलग मुद्दों को लेकर चल रहा है।
लगभग डेढ़ माह पहले राज्य के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने राज्यपाल सह कुलाधिपति फागू चौहान से मुलाकात की थी और उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र के विलंब से चलने को लेकर पूरी जानकारी दी थी। कुलाधिपति को सौंपे पत्र में शिक्षा मंत्री ने कहा था कि कोरोना महामारी की वजह से विश्वविद्यालय लगातार बंद रहे लेकिन अब स्थिति सामान्य हो गई है। उन्होंने बताया कि कई परीक्षाएं अभी तक नहीं होने से छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। अब शिक्षा विभाग ने शिक्षा मंत्री के निर्देश पर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक माहौल के साथ ही कक्षा और परीक्षा नियमित करने की रणनीति बनाई है।
आज पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों के साथ कार्यशाला की शुरुआत
शिक्षा विभाग की नई रणनीति के तहत हर विश्वविद्यालय और इससे जुड़े कॉलेजों के साथ अलग-अलग बैठक और कार्यशाला की जाएगी। इसकी शुरुआत गुरुवार को ज्ञान भवन में की जा रही है। पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों के साथ कार्यशाला होगी। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालयों के सभी पदाधिकारी, पीजी डिपार्टमेंट के अध्यक्ष, सभी अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्य और उप प्राचार्य, सभी कॉलेजों के प्राचार्य और एक वरीय शिक्षक को शामिल होना है।
पिछले पांच-छह वर्षों में नवनियुक्त सहायक प्रोफेसर भी इसमें शामिल होंगे। गुरुवार को होने वाली कार्यशाला में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ ही पटना विश्वविद्यालय और एनओयू के कुलपति की मौजूदगी भी रहेगी। कार्यशाला में शामिल होने वाले सभी लोगों से शैक्षणिक स्थिति के बारे में और उससे जुड़े सुधार के बारे में लिखित सुझाव लिए जाएंगे।



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