पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) बिहार का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। पूरे राज्य से लोग यहां इलाज करवाने के लिए आते हैं। लेकिन यहां मरीजों को बेड तक नहीं मिल पा रहा है। जमीन पर इलाज हो रहा है। दवा और जांच भी बाहर की लिखी जाती हैं। अस्पताल में चारों ओर गंदगी पसरी रहती है। दैनिक भास्कर ने PMCH में पड़ताल की तो तस्वीरें चौंकाने वाली थी।
बच्चे का इलाज करा रहे बेड नहीं
सारण के अमवा गांव से बच्चे का इलाज कराने पटना मेडिकल कॉलेज आए सुरेश की पीड़ा सरकार के दावों पर भारी पड़ रही है। पीड़ा है कि बेटे को बेड दिलाने में समस्या हो गई। पेट में दर्द का इलाज कराने सारण से पटना आया लेकिन अस्पताल में दो दिनों तक बेड ही नहीं मिल पाया।
अस्पताल से बताया गया कि गर्मी में पेट के रोगी बढ़ गए हैं, इस कारण से बेड की समस्या है। सुरेश के पास इतना पैसा भी नहीं कि वह बच्चे का इलाज प्राइवेट अस्पताल में करा सके।
महिला वार्ड में दौड़ते रहिए नहीं मिलेगी मदद
पटना के बेल्छी के श्रीपत की पत्नी की तबीयत खराब थी। वह रात में पटना मेडिकल कॉलेज गया। कोई डॉक्टर नहीं मिला। रात में काफी प्रयास किया लेकिन कोई डॉक्टर नहीं मिला। स्टाफ के सहारे दवाएं चलती रहीं।
श्रीपत ने बताया कि जब तक सुबह नहीं हो जाती है, तब तक कोई व्यवस्था नहीं मिलती है। मरीजों को रात में स्टाफ के सहारे ही रहना पड़ता है। रात में कोई मरीजों का सुनने वाला नहीं होता है।

श्रीपत ने बताया कि जब तक सुबह नहीं हो जाती है, तब तक कोई व्यवस्था नहीं मिलती है।
दवाएं और जांच सब बाहर की
रोहन को तेज बुखार के साथ पेट दर्द हो रहा था। घर वाले इमरजेंसी में PMCH में भर्ती करवाया। जांच से लेकर दवा तक बाहर से होती हैं। सस्ती दवाएं हॉस्पिटल से मिल जाती हैं लेकिन महंगी दवाएं बाहर से लानी पड़ती हैं। जांच भी अस्पताल से नहीं हो रही है।
डॉक्टर भी मौखिक बोल देते हैं कि बाहर से कराना है। इस कारण से अस्पताल में जेब भी ढीली हो रही है। वह गोपालगंज से आकर इलाज करा रहे हैं, लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है।
2000 बेड के बाद भी मरीज परेशान
बिहार के सबसे बड़े अस्पताल PMCH में लगभग 2000 बेड्स हैं लेकिन जब बात मरीजों की सुविधा की आती है तो संस्थान फेल हो जाता है। अस्पताल में जिन मरीजों को बेड्स मिल जाते हैं, उनका इलाज़ तो ठीक से हो जाता है, लेकिन जिन मरीजों को बेड्स नहीं मिलता है, वह परेशान हो जाते हैं। जमीन पर ही उन्हें इलाज कराना पड़ता है।
मरीजों का कहना है कि इलाज के लिए बड़ी उम्मीद से आते हैं, लेकिन व्यवस्था से दुखी हो जाते हैं। महिला वार्ड का भी बुरा हाल है, यहां मरीजों को वेंटिलेटर तक नहीं मिल पाता है। मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है, लेकिन खराब बताया जाता है। अक्सर मरीजों को संसाधन का अभाव बताया जाता है।
इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है। मरीजों का कहना है कि संसाधन और व्यवस्था को लेकर वह हमेशा परेशान रहते हैं। मरीजों को अगर समय पर वेंटिलेटर न दिया जाए तो उनके साथ धोखा हो रहा है।

अस्पताल में दवा और जांच भी बाहर की लिखी जा रही है।
भर्ती मरीजों का भी पेट नहीं भरता
अस्पताल में भर्ती मरीजों को खाना भी दिया जाता है, लेकिन उसकी क्वालिटी ठीक नहीं होती है। मरीजों को समस्या होती है, सुबह नाश्ता से लेकर खाना तक गुणवत्ता वाला नहीं होता है। पटना के मरीज राकेश कुमार का कहना है कि खाना ठंडा दिया जाता है, गुणवत्ता भी नहीं होती है।
मरीजों का कहना है कि अस्पताल से खाना मिलता है लेकिन अपनी मर्जी के हिसाब से देते हैं। खाना देने का भी कोई निश्चित समय नहीं है। जब मन होता है, तब खाना दिया जाता है। कभी खाना सुबह के 10 बजे ही दे दिया जाता है तो कभी दिन के 12 बजे तक मरीज भूखे रहते हैं। इतना ही मरीजों का आरोप है कि जो खाना दिया जाता है वह खाने लायक नहीं रहता।
साफ सफाई के नाम पर जीरो है अस्पताल
PMCH में साफ सफाई नहीं रहती है। वार्ड से लेकर कैंपस में हमेशा बीमारी का खतरा रहता है। साफ सफाई को लेकर कोई व्यवस्था नहीं रहती है, मरीजों को नीचे लिटाकर इलाज किया जाता है। ऐसे में इंफेक्शन का खतरा रहता है। साफ सफाई को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। वार्ड साफ सुथरा नहीं है, इस कारण से समस्या है। फर्श पर झाड़ू पोंछा नहीं लगाए जाने की शिकायत भी मरीजों के तीमारदारों ने की है। उनका आरोप है कि वह बार बार इसे लेकर शिकायत करते हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
मरीजों का आरोप है समय पर मरीजों के बेड शीट्स भी नहीं दी जाती है। गंदी चादर पर इंफेक्शन का खतरा रहता है। मरीजों का कहना है कि संस्थान को बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए जिससे कोई समस्या नहीं हो। मांग की जा रही है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा जाता है।
अस्पताल अधीक्षक ने कहा कि बेड की संख्या से अधिक मरीज आ जाते हैं। PMCH में 2000 बेड की व्यवस्था है लेकिन 6000 मरीज आ रहे हैं। ज्यादा मरीज होने के कारण उनका इलाज जमीन पर हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन जल्द से जल्द बेहतर व्यवस्था की कोशिश में जुटी है। साफ-सफाई के लिए कर्मियों को लगाया गया है।



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