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कोरोना से 45 दिन में 15 की मौ’त…एक जैसा पैटर्न:डॉक्टर्स को भी चकमा दे रहा संक्रमण

30 साल के राजेश कुमार को 7 जून को पटना AIIMS में भर्ती कराया गया। हाथ पैर में दर्द की समस्या से भर्ती राकेश को कोरोना का कोई लक्षण नहीं था। पटना AIIMS ने 7 दिन बाद कोरोना की जांच कराई तो वह पॉजिटिव पाया गया। पटना AIIMS ने 18 जून को कोरोना वार्ड में शिफ्ट किया, लेकिन 15 जुलाई तक वह निगेटिव नहीं हुआ। वह जिंदगी की जंग हार गया।

चौकाने वाला मामला यह है कि 45 दिन में 15 संक्रमितों की मौत का एक जैसा ट्रेंड रहा है। राजेश के परिवार वालों की तरह 45 दिन में मरने वालों के परिवार को कोई सदस्स संक्रमित नहीं हुआ। डॉक्टर भी मौत के इस नए ट्रेंड से हैरान हैं। जानिए 45 दिन में कोरोना से होने वाली मौत की ऑडिट रिपोर्ट।

3 लहर में कभी नहीं हुईं संक्रमित, बिना लहर हो गई मौत

सुपौल के गोविंदपुर की रहने वाली 60 साल की रम्भा देवी कोरोना की तीनों लहर में कभी संक्रमित नहीं हुईं। दम फूलने की दवा पहले से चल रही थी। शनिवार को तबियत खराब हुई तो घर वाले पटना AIIMS ले गए, जहां 15 जुलाई को उनकी मौत हो गई। बेटे मनोज ने बताया कि घर में उन्हें कोरोना का कोई लक्षण ही नहीं था, बस पहले की तरह सांस फूल रही थी।

पटना AIIMS की जांच कोरोना मिला। परिवार के सभी सदस्यों की जांच हुई, लेकिन कोई पॉजिटिव नहीं मिला। हैरानी की बात है कि घर में क्लोज कांट्रैक्ट में रहने वाले भी निगेटिव हैं, ऐसे में कोरोना कहां से आया ये बड़ा सवाल है। वह घर से कहीं बाहर नहीं जाती थीं और घर में भी कोई बाहरी नहीं आता था।

मां के साथ पूरा परिवार निगेटिव, बच्चा पॉजिटिव

मुजफ्फरपुर के इंदरवारपुर में एक 4 माह के बच्चे क मौत ने भी डॉक्टरों को चौंका दिया है। पटना AIIMS में 15 जुलाई को हुई 4 माह के मासूम की मौत के बाद मां से लेकर परिवार के सभी सदस्यों की कोरोना जांच की गई लेकिन सभी निगेटिव पाए गए। अब सवाल है कि मासूम को कोरोना कहां से हो गया। पटना AIIMS के डॉक्टरों का मानना है कि जांच में संक्रमित पाया गया, कहां से पॉजिटिव हुआ जांच का विषय।

पूरा घर कोरोना मुक्त, महिला की हो गई मौत

पटना की रहने वाली 45 साल की अनीला खातून की 12 जुलाई को पटना AIIMS में कोरोना से मौत हो गई। कोरोना की पुष्टि के बाद 11 जुलाई को उन्हें कोविड वार्ड में भर्ती किया गया था। मौत के बाद जब घर वालों की जांच कराई गई तो पूरा परिवार निगेटिव पाया गया।

कोरोना का संक्रमण कहां से हुआ यह पता ही नहीं चल पाया। घर वाले भी कोरोना को लेकर हैरान हैं। परिवार वालों का कहना है कि जो 24 घंटे साथ था वह भी निगेटिव है, ऐसे में कोरोना कहां से आया बड़ा सवाल है।

45 दिन में कोरोना ने पकड़ी रफ्तार

काेराेना ने 45 दिनों में काफी तेज रफ्तार पकड़ी है। एक जून को राज्य में केवल 9 नए मामले आए थे, लेकिन जुलाई में मामला तेजी से बढ़ गया। अब नए मामले 300 से लेकर 500 के बीच आने लगे हैं। 16 जून को 388 नए मामले आए हैं।

संक्रमण की बढ़ती रफ्तार खतरनाक हो रही है, क्योंकि इन 45 दिनों में मौत का आंकड़ा बढ़ा है। इस दौरान 4101 लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं, जिसमें 2641 अभी कोरोना से लड़ाई लड़ रहे हैं।

45 दिन में 15 मौत, नहीं मिली संक्रमण की जड़

एक जून से 15 जुलाई तक बिहार में कोरोना से 15 लोगों की मौत हुई लेकिन किसी भी मामले में संक्रमण की जड़ का पता नहीं चल पाया है। इस बार कोरोना के संक्रमण का सबसे चौंकाने वाला पहलू यही है कि परिवार में किसी की मौत होती है, लेकिन पूरा परिवार निगेटिव पाया जाता है। अब तक की 3 लहर में पहली बार ऐसा देखा जा रहा है जब ऐसे केस सामने आ रहे हैं। पूर्व में क्लोज कांट्रैक्ट में रहने वाले संक्रमित पाए जाते थे।

खतरनाक हो रही स्थिति :

पटना AIIMS के कोरोना विभाग के नोडल डॉ संजीव कुमार का कहना है कि मौत के मामले अचानक से बढ़े हैं। कोरोना के प्रोटोकॉल के हिसाब से इलाज किया जा रहा है। पहले से बीमार या फिर शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को बचाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में लोगों को अलर्ट रहना होगा।

अधिकतर मौत में एक जैसा मामला

पटना मेडिकल कॉलेज के कोरोना नोडल डॉ अजय अरुण का कहना है कि एक जून से अब तक 8 मौत हो चुकी है। चौंकाने वाली बात है कि सभी मौत में एक जैसे ही मामले आए हैं। घर वाला कोई पॉजिटिव नहीं मिल रहा है, परिवार को कमजोर व्यक्ति ही संक्रमित हो रहा है। मौत के बाद यह खुलासा चौंकाने वाला है, वह संक्रमित हुआ कहां से है। ऐसे हालात में लोगों को सावधान रहना होगा।

परिवार के कमजोर सदस्य को खतरा

पटना के फिजीशियन डॉ राणा एसपी सिंह का कहना है कि कोरोना से सावधान रहना होगा। संक्रमण के साथ मौत के मामले बढ़े हैं। घर में कोरोना कहीं से भी आए लेकिन खतरा परिवार के सबसे कमजोर व्यक्ति को ही है। वह गंभीर बीमारी वाला या फिर शारीरिक रूप से कमजोर सदस्य हो सकता है। ऐसे में परिवार के हर सदस्य को जागरुक होना होगा, क्योंकि कमजोर इम्युनिटी वालों की मौत हो रही है, चौंकाने वाली बात है कि बाकी परिवार संक्रमित तक नहीं हो रहा है। ऐसे में कोरोना की लहर की अपेक्षा यह समय काफी खतरनाक है।

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