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लहसुन के सेवन और ए’ल्‍कोहल स्‍प्रे करने से नहीं होगा कोरोना वायरस से ब’चाव, किसी गलतफहमी में न रहें आप…

कोरोना वायरस के इ’लाज को लेकर जो अ’फवाहें फै’लाई जा रही हैं, कहीं आप भी तो उन पर यकीन नहीं करने लगे हैं। यदि ऐसा है तो ये आपके लिए खत’रनाक हो सकता है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने इसको लेकर लोगों को चेताया भी है। इसके अलावा संगठन की तरफ से सोशल मीडिया के जरिये वा’यरल हो रही तरह-तरह की भ्रां’तियों का सच बताया है। आपको बता दें कि दुनिया के 76 देश इस वा’यरस की च’पेट में हैं। आपको बता दें कि डब्‍ल्‍यूएचओ ने साफ कर दिया है कि लहसुन में भले ही कई तरह के रोगों से लड़ने की प्रतिरो’धक क्ष’मता होती है, लेकिन को’रोना से ल’ड़ने या इसके इला’ज में इसका सेवन करना करना बिल्‍कुल झूठ है।इसी तरह से हल्‍दी का सेवन भी इस वायरस के इ’लाज में कारगर नहीं है। हालांकि हल्‍दी में कई तरह के प्राकृतिक गुण होते हैं। विश्‍‍‍व स्‍वास्‍‍‍‍थ्‍य संगठन ने साफ किया है अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है जिसमें इसकी पुष्टि की जा सके। अभी तक इस बात का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि जानवरों से नजदीकी की वजह से ये वायरस फैलता है। लेकिन इसके बाद भी ये अच्‍छा होगा पालतू जानवर जैसे कुत्‍ते, बिल्‍ली आदि के संपर्क में आने पर अपने हाथों को साबुन से अच्‍छे से धोना न भूलें। ये आदत आपको बै’क्‍टीरियल इं”फेक्‍शन से बचाने में सहायक साबित होगी।

फिलहाल इस वायरस के इ’लाज के लिए कोई दवा तैयार नहीं की जा सकी है। इतना जरूर है कि इसको लेकर युद्धस्‍तर पर काम चल रहा है। डब्‍ल्‍यूएचओ का कहना है कि ये वायरस बिल्‍कुल नया है इसलिए इसकी दवा अलग और नई ही होगी। निमोनिया के इ’लाज में काम आने वाली दवाएं इस वायरस में कारगर नहीं हैं।डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताबिक चीन से आने वाले पत्र या पार्सल को छूने से इस वायरस की चपे’ट में आने का ख’तरा नहीं है। पूर्व के विश्‍लेषणों के मुताबिक कोरोना वायरस पत्र, पार्सल और पैकेज पर ज्‍यादा समय तक नहीं रह सकता है। यदि आप कोरोना वाय’रस से सं’क्रमित हो चुके हैं तो शरीर पर एल्‍कोहल या क्‍लोरीन का स्‍प्रे इसके वायरस को नहीं मा’र सकेगा। इस तरह से शरीर पर किया गया स्‍प्रे आपके कपड़ों को ही नहीं बल्कि आपकी आंखों और मुंह के लिए भी नु’कसानदायक साबित हो सकता हे। आपको बता दें कि इन चीजों का स्‍प्रे केवल सर्फेस से इं’फेक्‍शन को खत्‍म करना, लेकिन इसका भी इस्‍तेमाल बिना जानकारी के नहीं करना चाहिए।  थर्मल स्‍कैनर उन लोगों की पहचान में सहायक है जिन्‍हें बु’खार है। ये कोरोना वायरस से पीडि़त लोगों की पहचान कर सकता है, क्‍यों‍कि इसमें भी बु’खार के साथ-साथ खां’सी और जु’काम होता है। इसके अलावा ये स्‍कैनर उन लोगों की जांच करने में सहायक नहीं है जो वा’यरस की चपे’ट में तो हैं लेकिन उन्‍हें बु’खार नहीं है। आपको ये भी बता दें कि इस वायरस की च’पेट में आने के करीब 2-10 दिन में बुखा’र आता है। 

इस वायरस की च’पेट में हर उम्र का व्‍यक्ति आ सकता है। बुजुर्ग अक्‍सर पहले से ही अस्‍थमा, डायबिटीज और दिल की बी’मारियों से पी’डि़त होती हैं, इसलिए भी उन्‍हें इसके संक्र’मण का ख”तरा अधिक होता है। 

अल्‍ट्रा वॉयलेट लैंप वायरस के ब’चाव में कितना सहायक 

इस लैंप का इस्‍तेमाल हाथों को स्‍टरलाइज करने के लिए नहीं करना चाहिए। इसकी वजह से कई बार शरीर में इरिज़टेशन भी हो जाती है। 

हैंड ड्रायर कोरोना वा’यरस को रोकने में कितना सहायक 

डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताबिक ये एक ऐसी अफवाह है जो कई जगह फैलाई जा रही है। लेकिन ये सरासर झूठ है। यदि आपको इस वायरस से बचना है तो इसका सीधा सा उपाय है कि आप अपने हाथों को साफ रखें और कुछ कुछ समय बाद साबुन से धो’ते रहें। हाथ धोने के बाद इन्‍हें पेपर टॉवल या वार्म एयर ड्रायर से सुखा लें।  

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