सात फेरों के समय जनम जमन तक साथ निभाने का वादा करने वाली पत्नी, पति के मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। उसने भी अपने प्राण त्याग दिए। परिजनों ने दोनों के शव को एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। मामला बरियारपुर प्रखंड के रतनपुर पंचायत के काजीचक गांव की है। यहां शनिवार को डॉक्टर पति की अंतिम संस्कार की तैयारी थी। इसी बीच उनकी पत्नी को सदमा लगा और उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद दंपती की एक साथ अर्थी निकली।

दंपती की फाइल फोटो।
दरअसल, वेटेनरी डॉक्टर रहे डॉ बटेश्वर पासवान (75) की लंबी बीमारी से शुक्रवार की रात निधन हो गया। शनिवार को उनके अंतिम संस्कार के लिए गंगा घाट ले जाने की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच डॉ. बसवेश्वर पासवान की पत्नी कृष्णा देवी (70) को सदमा लगा और उनकी भी मौत हो गई। इसके बाद दंपती का गंगा घाट में एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।

पति के शव को गंगाजल देती पत्नी।
दंपती का शव एक साथ काजीचक गांव से निकला। यह लोगों के चर्चा का विषय बन गया। लोग कहते नजर आए कि साथ जीने-मरने की कसम को निभाने की कहानी सुनी तो जाती थी लेकिन अब देखने को भी मिली है। जो पूरे पंचायत के साथ आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है। डॉ. दंपति के इकलौते पुत्र शिक्षक रंजीत पासवान ने दोनों को मुखाग्नि दी।



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