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सरकारी जमीन पर कैसे बनते गए मकान:राजीव नगर के 400 एकड़ में 30% मकान तो पुलिस वालों के

आशियाना दीघा राेड के पश्चिम के 400 एकड़ में 50 एकड़ पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया। बाकी 350 एकड़ का भविष्य हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर है। बुधवार को सुनवाई भी है। मंगलवार को भास्कर की 3 टीमों ने अलग-अलग हिस्से में जाकर पड़ताल की। सामने आया कि हाईकोर्ट अगर रोक नहीं भी लगाता तो हर कदम प्रशासन की राह मुश्किल ही होनी थी। कारण, करीब 30% मकान पुलिस, 10% नेताओं, 10% भूमाफिया और कारोबारियों के हैं।n

बाकी 50% आम लोग हैं, जो भूमाफिया के झांसे में आ गए। पुलिस वालों में भी 10 से अधिक आईपीएस हैं। इसमें पटना में पाेस्टेड एक आईपीएस, एक जिले के एसएसपी, डीआईजी, सीआरपीएफ के अधिकारी, भाजपा नेता के एक आईपीएस दामाद, 15 से अधिक थानेदार, 500 से अधिक दाराेगा, जमादार और पुलिस के जवान के मकान और जमीन हैं। साथ ही 50 से अधिक वकील, पत्रकार, न्यायिक अधिकारियाें के भी मकान हैं।

तोड़े गए मकान को छोड़ने के लिए भी लोग तैयार नहीं। वहीं पहरेदारी कर रहे हैं। बिना बिजली, बिना पानी के।

तोड़े गए मकान को छोड़ने के लिए भी लोग तैयार नहीं। वहीं पहरेदारी कर रहे हैं। बिना बिजली, बिना पानी के।

अधिकतर प्रॉपर्टी रिश्तेदारों या परिचितों के नाम पर ही

आसपास का हर शख्स जानता है कि ये मकान किस अफसर या नेता का है, लेकिन जब कागजों को तलाशा गया तो अधिकतर में नाम किसी और का ही दर्ज है। कई ने अपने रिश्तेदारों (खासकर ससुराल पक्ष) के नाम पर जमीन ले रखी है। गैर सरकारी लोगों ने अपने नाम पर ही प्रॉपर्टी रखी है।

कोर्ट के आदेश के बाद बिना भेदभाव के ही होगी कार्रवाई

50 एकड़ जमीन से जाे अतिक्रमण हटाया गया, उनमें भी कई पुलिस पदाधिकारियाें, प्रशासनिक अफसरों के मकान थेे। उन्हें भी बिना भेदभाव के ताेड़ा गया। मामला पटना हाईकाेर्ट में लंबित है। हाईकाेर्ट से जाे भी आदेश हाेगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई हाेगी। आगे भी जो भी कार्रवाई होगी, वह बिना भेदभाव के ही होगी।

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