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मुजफ्फरपुर : साइकिल का पहिया चलने से खेताें में होगा छिड़काव, 12 स्टूडेंट्स ने बनाया एग्रीकल्चरल स्प्रेयर

अब पीठ पर मशीन टांगकर खेतों में स्प्रे के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनों से निजात मिलेगी। एमआईटी के स्टूडेंट्स ने मिलकर एग्रीकल्चरल स्प्रेयर तैयार किया है। साइकिल के पहिए की मदद से तैयार इस विशेष यंत्र को आगे की तरफ चलाने पर ऑटोमेटिक छिड़काव होता रहेगा। बस सिर्फ पहिए को आगे बढ़ाते जाना होगा। इसमें बहुत ज्यादा एनर्जी भी नहीं लगेगी।

इसे एमआईटी के मैकेनिकल ब्रांच के थर्ड सेमेस्टर के स्टूडेंट्स ने मिलकर तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट में 12 स्टूडेंट्स शामिल हैं। पिछले दिनों विभाग की ओर से आयोजित प्रजेंटेशन में इसे पेश किया गया है। छात्र चंदन कुमार पंडित ने बताया, इस मॉडल में सबसे अगले हिस्से में साइकिल का पिछला पहिया जोड़ा गया है। साइकिल के पैडल में एक कनेक्टिंग राॅड लगाया गया है। यह अप-डाउन करता है।

इसमें एक पंप लगा है। पैडल के ऊपर-नीचे जाने के साथ ही पंप की सहायता से स्प्रे होता है। स्टूडेंट्स ने बताया, थर्ड सेमेस्टर में छात्रों को अपना प्रोजेक्ट तैयार करना होता है। इसमें आर्यन सिंह, आदित्य सिंह, चंदन कुमार, अभिनव कुमार, आनंद कुमार, अन्मित कुमार, भारती कुमारी, आनंद कुमार, अविनाश कुमार, मो. बशर आलम, आदित्य कुमार शामिल हैं।
तकनीक : अब पीठ पर मशीन टांगकर स्प्रे वाली मशीन से मिलेगी निजात, एनर्जी भी बचेगी

पीठ दर्द और कंधे के दर्द से मिलेगी मुक्ति : प्रो. अंकित

एमआईटी के मैकेनिकल ब्रांच के शिक्षक प्रो. अंकित कुमार ने बताया, छात्रों की ओर से तैयार इस मॉडल के इस्तेमाल करने से पीठ दर्द और कंधे के दर्द से मुक्ति मिलेगी। इससे मॉडल को स्टैंड में लगाकर रखने की जरूरत नहीं होगी। अभी लिक्विड को स्टोर करने के लिए 15-20 लीटर वाले डिब्बे का इस्तेमाल आसानी से हाे सकता है। इसकी क्षमता भी 50 लीटर तक बढ़ सकेगी। बड़े डिब्बे में नोजल और पंप लगाकर इसका इस्तेमाल पानी भरने के लिए किया जा सकेगा।

दुर्गम इलाकों में जानकारी जुटाएगा फोरलेग्ड रोबोटिक

पहाड़ की कंदराओं से लेकर दुर्गम क्षेत्र, खदान तक में पहुंचकर जानकारी जुटाने के लिए छात्र शशांक कुमार के नेतृत्व में फोरलेग्ड रोबोटिक का निर्माण किया गया है। इस रोबोट में पैर लगे हैं। राह में आने वाली छोटी-मोटी बाधाओं को यह पार कर सकेगा। ऐसे स्थान में जहां इंसान की पहुंच नहीं हो सकती है, वहां इस रोबोट का इस्तेमाल हाे सकेगा। इसे सात स्टूडेंट्स की टीम ने मिलकर तैयार किया है।

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