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BREAKING: नालंदा में मिला 32 सौ साल पुराने शहर का अवशेष…

प्रखंड के रुखाई गांव के नवादा टोला के पास तालाब खुदाई के दौरान शुक्रवार को काला पत्थर की खंडित प्राचीन मूर्ति मिली। वहीं पुरानी दीवार और कई मृदभांड मिले हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा की गयी खुदाई के दौरान वर्ष 2015 में भी यहां ये सामान मिले थे। शुक्रवार को मिले अवशेषों की पहचान कर बीएचयू के आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रो. गौतम कुमार लामा ने बताया कि मिले अवशेष 32 सौ साल पुराने हैं। आर्थिक कमी के कारण वर्ष 2015 में खुदाई पूरी नहीं की जा सकी थी। लेकिन, तब और अब मिले अवशेषों से यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि यहां सुसज्जित नगर रहा होगा। यह गांव राजगीर और पाटलिपुत्र की मध्य दूरी पर है। ऐसे में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि राजगीर से पाटलिपुत्र जाने के क्रम में बौद्ध भिक्षु यहां ठहरते थे।

इस गांव के लोगों पर महात्मा बुद्ध का काफी प्रभाव था। क्योंकि, खुदाई के दौरान लोहा अथवा हड्डी के औजार नहीं मिले थे। इससे यह माना गया कि यहां शाकाहार लोग बसते थे। यहां मिले एनबीपीडब्ल्यू (नॉदर्न ब्लैक पॉलीस्ड वेयर) मिले हैं। उनकी कार्बन डेटिंग से उनकी आयु 32 सौ साल पुरानी पायी गयी। बौद्ध भिक्षुओं के ठहराव स्थल होने के कई और प्रमाण मिल हैं।यहां बर्तन के रूप में कटोरे (बॉल) मिले हैं। कटोरे का उपयोग बौद्ध भिक्षु अनाज मांगने के काम में लाते थे। कई कुआन के साथ ही 5 कमरों के होने के अवशेष मिले हैं। 3 से साढ़े 3 हजार साल पुराना तांबा का सिक्का मिला, जिसपर नंदी के चिह्न बने हैं। कई छोटे-छोटे खिलौने और औजार मिले हैं। रुटाई में मिले सामान जुआफरडीह में मिले अवशेषों के समान हैं।

कैसे मिली मूर्ति
प्राचीन मूर्ति मिलने की खबर सुन चंडी थाने की पुलिस स्थल पर पहुंचकर मूर्ति को कब्जा में ले लिया। मुखिया अंजलि देवी व पति रौशन कुमार ने बताया कि जल-जीवन हरियाली के तहत लघु सिंचाई विभाग से तालाब की खुदाई की जा रही है। खुदाई के दौरान काला पत्थर की टूटी मूर्ति मिली। मूर्ति निकलने की सूचना पर कई गांवों के लोग मूर्ति को देखने पहुंचे। लोगों ने बताया कि मूर्ति भगवान बुद्ध की है।मूर्ति के मिलने की जगह से करीब सौ फीट की दूरी पर खुदाई के दौरान प्राचीन काल के ईंटों से बनी दीवार मिली। लोगों ने बताया कि रुखाई गांव में पांच बड़े तालाब थे।

यहां भगवान बुद्ध के आगमन की किवदंती है। गांव के पास टीले पर चीनी यात्री फाह्यान के ठहरने की भी बात कही जाती है। लोग इसे किसी सभ्यता व संस्कृति से जोड़कर देख रहे हैं। इन मृदभांड को 1200 ई पूर्व से लेकर 200 ई पूर्व तक का बताया जा रहा है। उत्खनन में मिट्टी के बर्तन, मानव ह’ड्डी, रिंग वेल, अनाज के दाने, मिट्टी का फर्श, मिट्टी के मनके, चित्रित धूसर मृदभांड, नगरीय व्यवस्था के अवशेष, पांच कमरों का मकान सहित कई अवशेष मिले हैं।


यहां भगवान बुद्ध के आगमन की किवदंती है। गांव के पास टीले पर चीनी यात्री फाह्यान के ठहरने की भी बात कही जाती है। लोग इसे किसी सभ्यता व संस्कृति से जोड़कर देख रहे हैं। इन मृदभांड को 1200 ई पूर्व से लेकर 200 ई पूर्व तक का बताया जा रहा है। उत्खनन में मिट्टी के बर्तन, मानव ह’ड्डी, रिंग वेल, अनाज के दाने, मिट्टी का फर्श, मिट्टी के मनके, चित्रित धूसर मृदभांड, नगरीय व्यवस्था के अवशेष, पांच कमरों का मकान सहित कई अवशेष मिले हैं।

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