सीतामढ़ी में घोषणा के पांच साल बाद भी आज एक भी प्रखंड में इंग्लिश स्कूल नहीं खुली। जिले के सभी प्रखंडों में एक एक सरकारी इंग्लिश मिडियम स्कूल खोला जाना था। जिसकी घोषणा वर्ष 2017 में की गई थी। इसको लेकर विभागीय आदेश भी जारी किए गए, लेकिन इंग्लिश के शिक्षकों की कमी बताकर इसपर ध्यान नहीं दिया गया। 17 प्रखंडों में से चुनिंदा एक-एक इंग्लिश मिडियम के स्कूल की स्थापना के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले अंग्रेजी शिक्षकों की सूची मांगी गई थी। स्थानीय अधिकारियों ने इसपर तेजी नहीं दिखाई और फाइल दबी रह गई।
सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की अंग्रेजी भाषा में पकड़ निजी विद्यालयों की तुलना में कम मानी जाती है। जिले के अंग्रेजी मीडियम के सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई होने की चर्चा के बाद अभिभावकों को उम्मीद जगी थी कि उनके बच्चों की अंग्रेजी भाषा सुधर जाएगी। लेकिन वह सपना अब खत्म होते दिख रहा है। सरकार द्वारा प्रत्येक प्रखंड में अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की स्थापना व संचालन संबंधी आदेश से उस समय गरीब अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी, लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। परियोजना फाइलों में ही कहीं न कहीं दम तोड़ बैठी है।
इस संबंध में बिहार शिक्षा परियोजना के तत्कालीन राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डा. अर्चना वर्मा ने निदेशक प्राथमिक शिक्षा के आदेश के आलोक में डीपीओ को लिखे पत्र में कहा था कि सभी 17 प्रखंडों में एक-एक इंग्लिश मिडियम विद्यालय की स्थापना हो। विभाग की ये पहल इसलिए सफल न हो सकी, क्योंकि जिले में इंग्लिश शिक्षकों की घोर कमी है। इतना ही नहीं जो शिक्षक हैं भी उनमें इस तरह की गुणवत्ता नहीं जो अंग्रेजी कल्चर का विस्तार कर सकें। और कुछ है भी तो उनका चयन नही किया जा सका।
इस संबंध में एसएसए के डीपीओ से पूछे जाने पर बताया की इस तरह की बातें हमारे संज्ञान में नहीं हैं। फिर भी इसकी जानकारी ली जाएगी। तब स्पष्ट हो पाएगा कि विभाग का निर्देश क्यों फाइलों में सिमट कर रह गया।






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