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Nirbhaya Case: फां’सी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पवन, बोला- ‘उम्रकै’द दे दीजिए’

निर्भया सामूहिक दु’ष्कर्म मा’मले में फां’सी की स’जा पाए चारों दो’षियों में से एक पवन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में क्यू’रेटिव याचिका दाखिल की है। याचिका में दो’षी पवन ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी फां’सी की स’जा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की है। इसके अलावा पवन कुमार गुप्ता ने निचली अदालत की तरफ से जारी किए गए डे’थ वा’रंट पर भी रोक लगाने की मांग की है। पवन के वकील एपी सिंह ने क्यूरेटिव याचिका दाखिल करते हुए कहा कि पवन को फां’सी की स’जा नहीं दी जानी चाहिए। पवन ने अपनी याचिका में खुद को वार’दात के समय नाबालिग होने का भी जिक्र किया है।निर्भया सामूहिक दु’ष्कर्म और हत्’या मा’मले में इससे पहले तीन दो’षियों मुकेश, विनय और अक्षय की द’या याचिकाएं पहले ही राष्ट्रपति ने कर दी थी।

चारों में से सिर्फ पवन गुप्ता ही एक ऐसा दो’षी है जिसने अभी तक अपने सभी कानूनी विकल्प खत्म नहीं किए हैं। पवन के पास अभी राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने का भी विकल्प है।इसके अलावा अक्षय ने अभी राष्ट्रपति की दया याचिका खारिज करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चु’नौती भी नहीं दी है। जबकि दो अन्य दो’षियों ने दया याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती दी थी।

3 मार्च को दी जाने वाले फां’सी टल सकती है

बता दें कि ट्रायल कोर्ट ने 17 फरवरी को चार दो’षियों मुकेश कुमार सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय कुमार शर्मा (26) और अक्षय कुमार (31) के खिलाफ 3 मार्च को डे’थ वारंट जारी किया है। कोर्ट ने तीन मार्च सुबह 6 बजे चारों दो’षियों को फां’सी देने का आदेश दिया हुआ है। माना जा रहा है कि पवन के इस याचिका के बाद एक बार फिर फां”सी टल सकती है। कानूनी प्राव”धानों के मुताबिक जब तक किसी दो”षी के सभी ‘कानूनी उपाय खत्म नहीं हो जाते तब तक उसे फां’सी नही दी जा सकती।

अगर कोर्ट से दो’षी की याचिका खारिज भी हो जाती है तब भी उसे अन्य कानूनी विकल्पों के लिए 14 दिन का समय मिलता है। पटियाला हाउस कोर्ट द्वार निर्भया के दो’षियों के लिए जारी डे’थ वारंट के अनुसार तीन मार्च को सुबह छह बजे उन्हें फां”सी पर ल”टकाया जाना है। जेल सूत्रों का कहना है कि अभी फांसी को लेकर तैयारी इस तरह की जा रही है कि इसकी भनक ‘दो’षियों को न लगे। फां’सी प्लेटफॉर्म की सफाई रोजाना हो रही है। फंदे की रस्सी को जिस बक्से में रखा गया है उसे प्रतिदिन देखकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि रस्सी में फफूंद या कोई अन्य समस्या तो नहीं है।बता दें कि रस्सी को नरम करने के लिए बटर या पके केले का इस्तेमाल किया जाता है। फंदे की कुछ रस्सी ऐसी भी है जिनपर पूर्व में ट्रायल के दौ’रान बटर का इस्तेमाल किया गया था, इनपर फफूंद लगने की आशंका रहती है।

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