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कष्टभंजन हनुमान मंदिर में स्त्री रूप में विराजित हैं शनिदेव, यहां पूजा करने से दूर होते हैं शनि के दो’ष, होती हैं सारी मुरादें पूरी ‘जय शनिदेव’

29 फरवरी को शनिवार है। इस दिन शनिदेव की विशेष पूजा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। ज्योतिष में शनि को ग्रहों का न्यायाधीश माना गया है। शनि सूर्यदेव के पुत्र हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनि क्रूर ग्रह माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में ये ग्रह अशुभ स्थिति में होता है, उन्हें कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। शनि के अशुभ असर को कम करने के लिए हनुमानजी की पूजा करने की सलाह दी जाती है। इसी वजह से हर शनिवार शनि के साथ ही हनुमानजी के मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ लगी रहती है। जानिए हनुमानजी के एक ऐसे मंदिर के बारे में, जहां शनिदेव स्त्री रूप में विराजित हैं। इस मंदिर का नाम कष्टभंजन हनुमान मंदिर है और ये गुजरात के भावनगर के पास सारंगपुर में स्थित है।

किले की तरह दिखाई देता है हनुमानजी का ये मंदिर

सारंगपुर का कष्टभंजन हनुमान मंदिर किसी किले की तरह दिखाई देता है। इसका स्वरूप बहुत ही भव्य है। मंदिर अपने पौराणिक महत्व, सुंदरता और भव्यता की वजह से काफी प्रसिद्ध है। कष्टभंजन हनुमानजी सोने के सिंहासन पर विराजमान हैं। यहां हनुमानजी को महाराजाधिराज के नाम से भी जाना जाता है। हनुमानजी की प्रतिमा के आसपास वानर सेना दिखाई देती है। हनुमानजी के साथ ही शनिदेव स्त्री रूप में भी विराजित हैं। शनि हनुमानजी के चरणों में बैठे हैं।

ये है हनुमानजी और शनि से जुड़ी कथा

मान्यता है कि प्राचीन समय में शनिदेव का प्रकोप काफी बढ़ गया था। लोगों को कई दु’खों और परे’शानियों का सामना करना पड़ा रहा था। शनि से बचाने के लिए भक्तों ने हनुमानजी से प्रार्थना की। तब हनुमानजी ने शनिदेव को दं’ड देने का निश्चय किया। जब शनिदेव को ये बात पता चली तो वे ड’र गए थे।

शनिदेव ये बात जानते थे कि हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी हैं और वे स्त्रियों पर हाथ नहीं उठाते हैं। इसलिए शनि ने स्त्री का रूप धारण कर लिया और हनुमानजी के चरणों में गिरकर क्षमा मांगने लगे। हनुमानजी ने शनिदेव को क्षमा कर दिया। क्षमा मिलने के बाद शनिदेव ने हनुमान से कहा कि उनके भक्तों पर शनि दोष का असर नहीं होगा। इस मंदिर में इसी प्रसंग के आधार पर शनिदेव को हनुमानजी के चरणों में स्त्री रूप में पूजा जाता है। भक्तों के क’ष्टों का निवारण करने की वजह से इस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है।

कैसे पहुंच सकते हैं मंदिर तक

ये मंदिर सारंगपुर में स्थित है। यहां आने के लिए पहले भावनगर तक पहुंचना होता है। भावनगर से सारंगपुर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। भावनगर के लिए सभी बड़े शहरों से आवागमन के कई साधन आसानी से मिल जाते हैं। सभी बड़े शहरों से भावनगर के लिए रेल गाड़ियां आसानी से मिल जाती हैं। भावनगर सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

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