‘क्या बताएं, जिस तरह दिल्ली में ब’वाल हो रहा है। इसमें वहां रहना मु’श्किल है। लोग सुरक्षित नहीं हैं। जिस समय हिं’सा भ’ड़की गो’लियां चलने लगीं। लोग सहम गए और घर से निकलना बंद कर दिया। देखते-देखते माहौल खराब हो गया। खाने-पीने तक की दिक्कत होने लगी। इससे काम छोड़कर अपने घर लौट आए।’ मुजफ्फरपुर जंक्शन पर गुरुवार को वैशाली एक्सप्रेस और बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की स्लीपर व अनारक्षित बोगी से दिल्ली से आनेवाले लोगों ने कुछ इस तरह से आपबीती सुनाई।दिल्ली में हो रही हिं’सा की वा’रदातों ने वहां रह रहे बिहार के लोगों के बीच खौ’फ पैदा कर दिया है और लोग मजबूरी में कामकाज छोड़ वापस लौट रहे हैं। रुन्नीसैदपुर की रीना देवी व मुकेश कुमार ने कहा कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में किराये के मकान में रहते हैं।

दस किमी की दूरी पर फैक्ट्री है। बस से आना-जाना होता है। हिं’सा से काम पर जाना बंद हो गया।उन्होंने बताया कि बच्चों का स्कूल भी जाना बंद हो गया। महीना अंतिम होने से खर्च में भी दि’क्कत हो गई। दिल्ली स्टेशन पर मुजफ्फरपुर आने वाली ट्रेनों की जनरल बोगी में इतनी भीड़ है कि चढऩा तक मु’श्किल है। मजबूरी में स्लीपर में जु’र्माना देकर फर्श पर बैठकर सफर करना पड़ा। वहीं, सीतामढ़ी निवासी मनोज कुमार व उषा देवी ने कहा कि उत्तरी पूर्वी दिल्ली में कब क्या हो जाएगा कहना मु’श्किल है। लोग काम छोड़कर घरों में दु’बके हैं। वे इतने सहमे हैं कि बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। शिवहर निवासी नीरज साह, अशोक कुमार ने कहा कि मौजपुर, सीलमपुर की स्थिति ठीक नहीं है।उन्होंने बताया कि बवाल ने लोगों का रोजगार बंद कर दिया। ठेला पर सामान बेचते थे। इससे परिवार चलाते थे, लेकिन वह भी बंद हो गया। काम-धं’धा बंद हो गया और सुरक्षित भी नहीं हैं। इससे गांव लौट आए। माहौल ठीक होने के बाद दिल्ली जाने का विचार करेंगे।




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