Breaking News

तेजस्वी की ताजपोशी पर लालू का स्ट्रांग मैसेज, सीढ़ियां चढ़कर फिटनेस बताई

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव 3 दिन से पटना में हैं। उनका हर कदम एक मैसेज के रूप में लिया जा रहा है। चाहे वे RJD दफ्तर में अपने समर्थकों से मिलने का जोश हो या फिर विधानसभा की सीढ़ियां चढ़कर जाने को हो। पहला मैसेज उन विरोधियों के लिए था, जो उनके स्वास्थ्य पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरा मैसेज पार्टी के अंदर के लोगों को, जो तेजस्वी को पार्टी की पूरी कमान देने की मांग कर रहे हैं।

73 साल के हो चले लालू यादव के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। एक तरफ सीबीआई और कोर्ट का चक्कर, वहीं दूसरी तरफ पार्टी और घर। उनके पटना आने से पहले राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से सार्वजनिक मांग की थी कि अब समय आ गया है तेजस्वी यादव को राजद की पूरी बागडोर सौंप दें। साथ ही यह मांग भी की थी कि राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों के लिए उम्मीदवार चयन का अधिकार भी तेजस्वी को दे दें।

मगर जब लालू पटना पहुंचे, तो दोनों ही बातों पर खामोश रहे। उन्होंने खुद ही राज्यसभा के लिए नाम फाइनल किए। शुक्रवार को खुद मीसा भारती और फैयाज अहदम के साथ विधान सभा पहुंचे। लालू प्रसाद किसी के सहारे कार की आगे की सीट से बाहर निकले और विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ते हुए सचिव के कार्यालय तक गए। नामांकन भरवाने के बाद लालू उसी तरह सीढ़ियों से उतरते हुए कार तक आए। लालू प्रसाद ने लोगों को मैसेज दिया कि वे अभी ठीक हैं। चल-फिर सकते हैं।

क्यों जल्दीबाजी नहीं की

लालू प्रसाद हर्ट और किडनी की बीमारी सहित अन्य कई बीमारियों से ग्रस्त हैं, लेकिन उनकी समझदारी अभी भी खूब है। लालू को करीब से जानने वाले राजनीतिज्ञों की मानें तो वे जानते हैं कि तेजस्वी को राजद की पूरी बागडोर यानी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के क्या-क्या खतरे हैं? लालू ने ही अपने परिवार में तेजस्वी यादव को सबसे काबिल नेता माना, इसलिए उपमुख्यमंत्री और फिर नेता प्रतिपक्ष बनवाया। तेजस्वी महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। उनके चेहरे पर ही विधानसभा चुनाव लड़ा गया था, यह और बात है कि यादवों ने लालू यादव के नाम पर वोट किया था। तेजस्वी को कई जगह कहना पड़ा था कि वे लालू यादव के बेटे हैं।

शिवानंद तिवारी की मांग के बाद लोगों के बीच यह चर्चा खूब हुई कि लालू प्रसाद के कहने पर ही शिवानंद तिवारी ने राजद की पूरी बागडोर तेजस्वी को सौंपने की मांग की। लेकिन यह सिर्फ चर्चा है। तेजस्वी ट्विटर वाली छवि के बाहर सड़क के नेता नहीं बन पाए हैं। नेता के कपड़े पहनना और नेता की तरह सड़क पर उतर कर लड़ना- भिड़ना, जरुरतमंदों या पीड़ितों के बीच जाना उन्होंने अभी ठीक से किया कहां है! कई बड़े मौकों पर गायब होने के आरोप उन पर लगते रहे। राजकुमार वाली छवि उनका पीछा नहीं छोड़ रही।

घर को पहले संभालना है

तेजस्वी को राजद की पूरी बागडोर लालू प्रसाद सौंपते हैं कि नहीं इसका इंतजार सभी को है। इंतजार इसका भी है कि कहीं घर के अंदर से ही इसका विरोध न हो जाए। परिवार से बाहर पार्टी में तेजस्वी का विरोध करने की ताकत किसी नेता में नहीं। भास्कर ने उस दिन पटना एयरपोर्ट पर राजद के नए-पुराने नेताओं से बात की थी। ज्यादातर का मानना रहा कि पार्टी तो तेजस्वी ही चला रहे हैं और तेजस्वी को बागडोर सौंप देनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने चुनाव में खुद को साबित भी किया है।

पार्टी के कई नेता यह भी कहते हैं कि लालू प्रसाद ने तेजस्वी को बागडोर नहीं सौंपी तो बाद में विवाद हो सकता है। इस सब से अलग लालू के मन की बात लालू ही जान सकते हैं। उनके सोचने-समझने का दायरा बड़ा है। उन्होंने बताया है कि हम अभी चल-फिर रहे हैं शिवानंद तिवारी !

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.