शहर से 160 किमी दूर गोंदलमऊ गांव, जिला आगर में भगवान शिव का अद्भुत मंदिर है। इस मंदिर का नाम श्री 1111 शिवलिंग महादेव मंदिर है। शिवलिंग पर ही 1111 छोटे-छोटे शिवलिंग उभरे हुए हैं। गांव के लोगों का कहना है शिवलिंग 600 साल से ज्यादा पुराना है, क्योंकि इस गांव को बसे ही 600 साल से ज्यादा हो चुके हैं। उसके पहले से यह मंदिर स्थापित है। गांव में करीब 400 परिवार रहते हैं। हालांकि पहले के वक्त में यह मंदिर काफी छोटा था। एक ही व्यक्ति झुककर मंदिर में प्रवेश कर सकता था। मुश्किल से दो से तीन लोग ही गर्भगृह में खड़े हो सकते थे। 13 दिसंबर 1999 में मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे बढ़ाया गया। अब मंदिर का गर्भगृह 13 बाय 13 फीट का है। जमीन से शिखर तक की ऊंचाई करीब 40 फीट है। भगवान के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। भगवान के गर्भगृह में जाने के पहले नंदी विराजमान है। अमूमन नंदी का एक ही चेहरा देखने को मिलता है, लेकिन यहां स्थापित नंदी के मुख के नीचे एक बालक का मुख भी नजर आता है। यह किसका मुख है, इसकी जानकारी गांव के लोगों को भी नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि संभवत: ऐसे नंदी सिर्फ यहीं है।
परिसर में समाधि वाले बाबा की स्थापना

जीर्णोद्धार के वक्त जब जमीन की खुदाई का काम किया गया तो यहां पर तीन लोगों की समाधि भी निकली। एक समाधि तो पूरी निकली। जिसे बाद में उज्जैन में बहा दिया गया। बाद में विद्वानों के कहने पर यहां पर समाधि वाले बाबा की स्थापना भी मंदिर परिसर में की गई। यहां पर हवन भी किए जाते हैं।
शिवरात्रि पर आते हैं 5 हजार से ज्यादा भक्त
शिवरात्रि पर भगवान का भव्य शृंगार किया जाएगा। भागवत कथा का भी आयोजन हो रहा है। शिवरात्रि पर पांच हजार से ज्यादा लोग यहां आते हैं। मंदिर में पं. बाबूलाल नागर व पं. ललित नागर द्वारा पूजन किया जाता है।
शहर से 160 किमी दूर गोंदलमऊ गांव में है मंदिर
श्री 1111 शिवलिंग महादेव मंदिर समिति अध्यक्ष रामसिंह राजपूत दरबार का कहना है कि शिवलिंग पर 1111 शिवलिंग उभरे हुए हैं। इससे एक वक्त में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से 1111 शिवलिंग पर जल चढ़ता है। सावन में आसपास के गांवों के अलावा कई शहरों से लोग यहां दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि जो भी मन्नत मांगो, वह पूरी होती है। मान्यता पूरी होने पर लोग यहां भंडारा भी करवाते हैं। गर्भगृह में मां पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमा भी स्थापित है, जिनकी रोजाना पूजा होती है। यहां 600 साल पुराना बरगद का एक विशाल पेड़ भी है, जहां नाग-नागिन आते हैं।




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