पिछले दो वर्षों में जिले में दूध का उत्पादन दो लाख लीटर तक कम हो गया है। इसकी बड़ी वजह जिले में दुधारू पशुओं की संख्या में कमी आना है। 2017 के मुकाबले 2019 में हुई पशुगणना में जिले में 2.86 लाख दुधारू पशु(गाय व भैंस) कम हो गए हैं। मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी 20वीं पशुगणना की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है
रिपोर्ट के अनुसार, 2017 की अपेक्षा 2019 में गाय की संख्या में जहां 1.97 लाख की कमी आई है। वहीं, भैंस की संख्या 98.7 हजार कम हाे गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक दशक से दुधारू पशुओं की संख्या जिले में लगातार कम हाेती जा रही है। दूसरी ओर, जिले की जनसंख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हाे रही है।
दस वर्ष पूर्व जहां जिले की जनसंख्या जहां 40 लाख थी, अब बढ़कर 52 लाख के करीब हाे गई है। जबकि, दुधारू पशुओं की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। इसके कारण दस वर्षों में दूध की कीमत 25 से 30 रुपए से बढ़कर 44 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
बाढ़ व अत्यधिक समय तक जलजमाव के कारण चारे पर संकट, इसलिए कम हो रहा पशुपालन
जिले में हर वर्ष आने वाली बाढ़ के साथ पिछले दाे वर्षों से हाे रही अत्यधिक बारिश के कारण जिले के 66 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जलजमाव हाे रहा है। इसके कारण बरसात के समय चार माह तक पशुपालकों काे अपने पशुओं काे रखना मुश्किल हाे रहा है।
अत्यधिक समय तक जलजमाव रहने के कारण पशु चारे का संकट हो जाता है। जलजमाव के कारण उस समय हरा चारा उपलब्ध नहीं हाेता है। वहीं, भूसे की कीमत बरसात के समय 10-12 रुपए किलाे तक पहुंच जाती है। ऐसी स्थिति में पशुपालकों को काफी परेशानी होती है। इस कारण भी लोग पशुपालन से विमुख हाे रहे हैं।
5 साल तक के बछड़े व 50 फीसदी पशु गर्भधारण और अन्य कारणों से नहीं देते दूध
जिला पशुपालन अधिकारी डॉ. घनश्याम माेदी के अनुसार, दुधारू पशुओं में पांच साल तक के बच्चे के साथ ही बाकी में 50 फीसदी पशु गर्भधारण व अन्य कारणों से दूध नहीं देते हैं। इसके कारण कुल पशुओं की संख्या के अनुसार प्रति पशु 300 ग्राम से लेकर अधिकतम 500 ग्राम तक दूध की गणना हाेती है। अगर इन गणना काे मानक माना जाए ताे पशुओं की कम हुई संख्या के अनुसार जिले में करीब दाे लाख लीटर दूध का उत्पादन कम हुआ है।







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