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पटना की पहली वुड वुमन लूसी: पुरुष प्रधान उद्योग में अपने कारीगरी से चला रही घर

बढ़ईगीरी हमेशा से एक पुरुष प्रधान उद्योग रहा है, लेकिन पटना की एक ऐसी महिला जो बढ़ईगीरी के पेशे में आकर सभी रूढ़ियों को तोड़ रही हैं। अनिशाबाद की रहने वाली लूसी जिसने 2017 में अपने पति को खोया जिसके बाद घर को चलाने वाला कोई ना था। 35 साल की लूसी के लिए काफी कठिन था ऐसे समाज में रहकर ये सब कर पाना, जहां महिला मजदूरी तो कर सकती है लेकिन बढ़ई का काम नहीं कर सकती। पति के चले जाने के बाद लूसी अकेले पर गई, घर में खाने तक के पैसे ना थे, एक तरफ ये समाज की बंदिशे और दूसरी तरफ लूसी को निहारते हुए उसके चार मासूम बच्चे। इसके बाद लूसी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम शुरू कर दिया।

सी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम शुरू कर दिया।

सी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम शुरू कर दिया।

बातचीत में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी काफी मुश्किल था। चार बच्चों के भोजन-पानी की चिंता थी इसलिए, समाज में लगे बंदिशों को तोड़कर अपने पैर पर खड़ा होने का फैसला किया। इस काम को सीखने के लिए मैंने किसी तरह की ट्रेनिंग नही ली बस मुझे लगा की मैं यह कर सकती हूं तो मैने इस काम को करना शुरू कर दिया। आज इस काम के जरिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हूं और साथ ही यह बिजनेस भी काफी अच्छा चल रहा है। आज मैं पलंग, सोफा, डाइनिंग टेबल, आदि फर्निचर की सारी चीज़े खुद तैयार करती हुं।

भास्कर से बातचीत में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी काफी मुश्किल था।

स्वाभिमान के साथ काम करती है लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा। लूसी मेहनत के अलावा काफी स्वाभिमान से काम करती है। लकड़ियों से एक से बढ़कर एक डिजाइन की फर्नीचर चंद घंटों में तैयार कर देती है। जब वो लकड़ियों पर कारीगरी करती है तो इतने लगन से अपने कामों में डूब जाती है की उसे अपने आस पास कुछ नहीं दिखता।

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