गोपालगंज सदर अस्पताल परिसर में लगे गैस पाईप को चोरों ने आसानी से काट कर चोरी कर ली लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। मामला सामने आने के बाद सदर अस्पताल की सुरक्षा पर अब सवाल उठने लगे है। हलांकि अस्पताल प्रशासन इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है।
दरअसल सदर अस्पताल को मॉडल सदर अस्पताल का दर्जा प्राप्त है और आई एस ओ से प्रमाणित भी है बावजूद यह अस्पताल हमेशा ही सुर्खियों में रहा है। और एक बार फिर सूखिर्यों में है। यहां दिन-दहाड़े चोरों ने ऑक्सीजन प्लांट की महंगी कॉपर पाइप गैस कटर से काटकर चोरी कर ली है। जिसके बाद से इमरजेंसी वार्ड समेत 105 बेडों पर ऑक्सीजन सप्लाई ठप हो गयी है। दो दिनों से अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा है। कब किसकी सांसे थम जाये, कहना मुश्किल है।
अस्पताल प्रशासन द्वारा सदर अस्पताल की सुरक्षा में 30 रिटायर्ड फौजियों की तैनाती है। सुरक्षा में बजट भी कई गुना बढ़ गयी है। फिर भी अस्पताल चोरों के लिए सेफजोन बना है। अब सवाल है कि जब अस्पताल के सुरक्षा में इतने रिटायर्ड फौजी सुरक्षा में तैनात है तो सबके नजरो के बीच से पाइप कैसे चोरी हो गई। क्या अस्पताल प्रशासन की मिली भगत से चोरी हो रही? अस्पताल प्रशासन से चोरों पर कार्यवाई करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाने के वजाये मीडियाकर्मीयो को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रवेश पर रोक लगा दी है। मगर यह रोक सिर्फ मीडिया पर लगी है। ताकि अस्पताल की सच को दिखाया नहीं जा सके।
उन चोरों पर नहीं, जो दिन के उजाले में सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट में चोरी कर जाते हैं। चोरी के इस मामले को अस्पताल प्रशासन ने दबाने की कोशिश की, लेकिन बाद में जब मीडिया पहुंची तो जवाबदेह अधिकारी ही चोरों पर कार्रवाई करने की बजाय अपनी जवाबदेही से बचने के लिए सिक्यूरिटी गार्ड को बुलाकर धैंस दिखाने लगे।







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