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इंसानों की तरह जानवरों में स्ट्रोक से फट रही नस, 108 डिग्री बुखा’र से अचानक हो रही मौ’त

इंसानों की तरह जानवरों में भी गर्मी से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। बारिश के बाद अचानक से पारा 42 डिग्री पार होते ही मौत का खतरा बढ़ गया है। एक सप्ताह में पटना में 100 से अधिक जानवरों की मौत ब्रेन स्ट्रोक से हुई है। गर्मी से मरने वालों में पालतू डॉग की संख्या अधिक बताई जा रही है। अचानक से शरीर का तापमान 108 डिग्री तक पहुंच रहा है, जिससे इलाज का भी मौका नहीं मिल रहा है। बारिश के बाद अचानक से बढ़ी गर्मी के कारण पटना वेटनरी कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हर दिन 100 से अधिक जानवरों का इलाज हो रहा है, इसमें गंभीर जानवरों की मौत का आंकड़ा भी अधिक है। मानसून आने तक जानवरों को लेकर पशु चिकित्सकों ने अलर्ट जारी किया है।

105 डिग्री के बाद जान बचाना मुश्किल

पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर व सर्जन डॉक्टर ज्ञान देव सिंह का कहना है कि तापमान अचानक से बढ़ गया है। इस कारण से इंसानों की तरह ही जानवरों में खतरा भी काफी बढ़ गया है। खतरा सबसे अधिक पालतू डाॅग में है, अच्छे प्रजाति के डॉग की अचानक से मौत हो रही है। डॉग में देखा जा रहा है कि 105 तक बुखार में वह बच जा रहे हैं, लेकिन गर्मी इतनी अधिक है कि अचानक से तापमान 108 हो रहा है और देखते ही देखते ब्रेन स्ट्रोक से मौत हो जा रही है। गाय और अन्य पालतू जानवरों में भी गर्मी के कारण ब्रेन स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ा हैञ।

ऐसे बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

पशु चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी में इंसान तो बचाव का उपाय कर लेते हैं, लेकिन जानवरों में ऐसा नहीं हो पाता है। तापमान जब भी अचानक से कम ज्यादा होता है तो उन पर खतरा बढ़ जाता है। घर में रहने वाले पालूत डॉग बिल्ली और गाय में ऐसी घटना देखी जा रही है। बारिश के कारण मौसम थोड़ा ठंडा हुआ था लेकिन अचानक से फिर तापमान 42 डिग्री पार हो गया है। इस कारण से अचानक शरीर का तापमान बढ़ रहा है जिससे ब्रेन की नस फट जा रही है। डॉग में 105 डिग्री तक तो ठीक है, लेकिन इससे बढ़ते ही दिमाग की नसें फट जा रही है।

ब्रेन की नस फटना हो गया आम

पशु चिकित्सकों का कहना है कि ब्रेन की नस फटना जानवरों के लिए इस गर्मी में आम बात हो गई है। डॉ ज्ञान देव सिंह का कहना है कि गर्मी बढ़ते ही ओपीडी और इमरजेंसी में जानवरों की भीड़ बढ़ गई है। इमरजेंसी में आने वाले जानवरों को काफी गंभीर स्थिति देखने को मिल रही है। ऐसे जानवराें को भर्ती करना पड़ता है, स्केनिंग में अधिकतर जानवरों में ब्रेन स्ट्रोक के मामले आते हैं। इलाज के लिए अस्पताल में जांच व अन्य व्यवस्था है।

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