विश्वेश्वरैया भवन अग्निकांड में जांच से जुड़ी कई फाइलों के नष्ट होने की आशंका है। ये गड़बड़ियों से जुड़ी अहम फाइलें थीं। कई गंभीर आरोपों की जांच भी चल रही थी। आग लगने की स्थिति को देखते हुए इन सबके स्वाहा होने की आशंका है। आकलन तो बाद में होगा, लेकिन यह तय है कि इसमें हजारों अहम दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं और जिनके सबूत तक नहीं मिलने वाले।
संभवत: आग में ही कई अहम राज पूरी तरह से दफन हो जाएंगे। इस घटना में ग्रामीण कार्य विभाग को सबसे अधिक क्षति उठानी पड़ी है। बड़ी संख्या में उसकी फाइलें नष्ट हुई हैं। साथ ही फर्नीचर, कम्प्यूटर और डिजिटल दस्तावेज भी नष्ट हो गए हैं। विभाग का कार्यालय पांचवें तल्ले पर है और सबसे भीषण आग वहीं लगी है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण और उनकी मरम्मत से जुड़ी फाइलों के जलने की भी आशंका है।
इसके अलावा नई योजनाओं से संबंधित फाइलों के भी नष्ट होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। उधर, भवन निर्माण विभाग की डिजाइनिंग की फाइलें नष्ट हुई हैं। इसके अलावा विभिन्न परियोजनाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलों के सेक्शन में भी आग की लपटों के पहुंचने से वहां भी भारी क्षति की आशंका है।
ग्रामीण कार्य मंत्री के चैंबर व कोषांग के अलावा अभियंता प्रमुख अशोक कुमार मिश्रा व अन्य सभी सीनियर इंजीनियरों, विशेष सचिव संजय दूबे का कार्यालय इसकी चपेट में आ गया। विभागीय कर्मियों के अनुसार जहां आग लगने की घटना हुई, वह ग्रामीण कार्य विभाग का ही कार्यालय था।
जीर्णोद्धार की योजना को झटका
इस अग्निकांड के बाद भवन के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण की योजना को तगड़ा झटका लगा है। इस समय सातवें तल्ले का निर्माण कार्य चल रहा था, जबकि मुख्य भवन के बाहर सौंदर्यीकरण का काम तेजी से जारी था। परिसर में नए भवन की भी तैयारी थी। लगभग 50 फीसदी काम पूरा भी हो चुका था।



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