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बिहार में अब कोई बच्चा नहीं रहेगा कुपोषित, 4.70 लाख अति कुपोषित बच्चों की ऐसे विशेष देखभाल करेगी सरकार; जानें क्या है प्लान

बिहार में 4.70 लाख अति कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल की जाएगी। सामान्य बच्चों के बीच से कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उनके पोषण स्तर में सुधार को लेकर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएंगी। राज्य सरकार स्वास्थ्य की दृष्टि से कमजोर बच्चों को लेकर विशेष पहल शुरू करने जा रही है। समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित समेकित बाल विकास निदेशालय के माध्यम से कुपोषित बच्चों की देखभाल को लेकर नई रणनीति के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। राज्य के 1.14 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों में से कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जाएगा। 

दो श्रेणियों में होगी देखभाल 

आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों में कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों को दो श्रेणियों में चिन्हित कर उनकी देखभाल की जाएगी। जिन बच्चों में कम वजन, अधिक रक्तअल्पता, नाटापन या कुपोषण का गंभीर प्रभाव पाया जाएगा, उन्हें अति कुपोषित बच्चों की श्रेणी में रखा जाएगा। जिनमें रक्तअल्पता थोड़ी कम होगी और सामान्य देखभाल की जरूरत होगी उन्हें कुपोषित बच्चों की श्रेणी में रखा जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों की स्वास्थ्य जांच करने वाली एएनएम बच्चों का वजन लेंगी, उनकी लंबाई की माप करेंगी और स्वास्थ्य की प्रारंभिक जानकारी एकत्र करेंगी। 

अति कुपोषित बच्चों को चिकित्सकीय देखरेख की आवश्यकता होने पर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के लिए अनुशंसा करेंगी। समेकित बाल विकास परियोजना निदेशालय के माध्यम से पूर्णिया मॉडल को पूरे बिहार में लागू करने पर विचार किया जा रहा है। पूर्णिया स्थित के-नगर प्रखंड में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में अति कुपोषित व थोड़े कम कुपोषित बच्चों को अलग-अलग चिन्हित कर उनकी देखभाल की गयी। 

अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कर इलाज किया गया और थोड़े कम कुपोषित बच्चों की देखभाल उनके माता-पिता की काउंसिलिंग कर उनके घर में ही करायी गयी। इनमें पाया गया कि बच्चों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। यह अभियान दस महीने के लिए संचालित किया गया, जिसके परिणाम बेहद सार्थक पाए गए हैँ। 

राज्य में आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों की संख्या:        99 लाख  
अति कुपोषित बच्चों की संख्या:                                4.70 लाख 
कुल आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या:                              1.14 लाख 
सक्रिय आंगनबाड़ी केंद्र:                                          1.10 लाख 
आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों की उम्र:                      0 से 6 साल

बिहार समेकित बाल विकास परियोजना निदेशालय के निदेशक आलोक कुमार ने कहा, ‘राज्य में कुपोषण की समस्या को समाप्त करने की दिशा में नई रणनीति के तहत पूर्णिया मॉडल को लागू करने पर विचार किया जा रहा है।’

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