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बिहार के इस जेल में महिला कै’दियों पर होता है अ’त्याचार ! तेजस्वी बोले- ये तो रा’क्षस राज है

मुजफ्फरपुर. बिहार का मुजफ्फरपुर शहर एक बार फिर से चर्चा में है. दरअसल मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारागार की एक महिला कैदी ने कुछ साल पहले पीएम मोदी को एक खत लिखा था, जिसके बाद राजनीति से लेकर प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया था. एक बार फिर यह मामला चर्चा में है. इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए एक बार फिर बड़ा सवाल उठाया है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि मुजफ्फरपुर जेल की महिला कैदी ने पीएम को पत्र लिखा है कि जेल के अंदर अ’त्याचार किए जाते हैं और जो इनकार करती है उसे भूखा रखा जाता है. तेजस्वी ने साफ तौर पर कहा कि ये तो राक्षस राज है

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बुलडोजर और लाउड स्पीकर के मुद्दे पर जमकर हमला बोला. तेजस्वी ने साफ लहजे में कहा कि बुलडोजर और लाउडस्पीकर की बात कहकर सही मुद्दे से लोगों को भटकाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, किसान, मजदूर पर बात क्यों नहीं होती लेकिन यहां तो कहा जा रहा है कि लाऊड स्पीकर से नींद नहीं आती क्योंकि कई लोग ऐसे हैं जो टीवी ऑन नहीं करें तब तक उन्हें ऐसे भी नींद ही नहीं आती है

आपको बता दें कि करीब तीन साल पहले मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारागार की एक महिला बंदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर जेल में अत्याचार होने की शिकायत की थी, इस मामले पर बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जेल में जाकर जांच करने और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की थी. पीएम को लिखे पत्र में महिला बंदी ने कहा था कि जेल में महिला बंदियों को गलत काम करने पर मजबूर किया जाता है. पदाधिकारियों और राइटर (बंदी) से संबंध नहीं बनाने पर पीटा जाता है और जो समर्पण कर देतीं हैं, उन्हें मोबाइल से बात करने समेत अन्य सुविधाएं दी जाती हैं.
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सभी कैदियों को शाम 6 बजे अंदर कर दिया जाता है मगर, राइटर को देर रात तक बाहर रहने की छूट है. वो देर रात महिला खंड में आते हैं. उनके साथ महिला बंदी को देर रात बाहर भेज दिया जाता है, इसके बाद उनका शोषण किया जाता है. बेटी के साथ जेल में बंद महिला बंदी के अनुसार पदाधिकारियों और राइटर की बातों का विरोध करने पर खाना नहीं दिया जाता है. पत्र में जेल की तीन महिला सिपाहियों के नाम का जिक्र किया गया था, कहा गया था कि 4 मार्च को इनमें से एक महिला सिपाही ने उसकी बेटी की इतनी पिटाई की थी कि वह बेहोश हो गई थी.

इस मामले को लेकर महिला बंदी ने प्रधानमंत्री के अलावा महिला आयोग, मुख्यमंत्री, राज्य के मुख्य सचिव और जेल आईजी को भी पत्र भेजा था, इस पत्र के बाद सेक्शन पदाधिकारी जितेंद्र कुमार मंडल ने राज्य के मुख्य सचिव और मुजफ्फरपुर के तात्कालिक डीएम आलोक रंजन घोष से मामले की रिपोर्ट मांगी थी. डीएम आलोक रंजन घोष ने 5 सदस्यीय जांच टीम का गठन किया था

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