शहर में जलजमाव की समस्या के समाधान को लेकर 25 साल बाद पौने दो करोड़ रुपए से फरदो नाले की उड़ाही शुरू की गई है। दामूचक से छाता चौक तक नाले की सफाई कर ली गई है। 3000 मीटर में 1345 मीटर नाले की सफाई पूरी हो चुकी है। कल्याणी चौक तक फरदो नाले की सफाई हो जाने पर मोतीझील, कल्याणी, जवाहरलाल रोड समेत शहर के कई प्रमुख इलाके नहीं डूबेंगे। लेकिन, उड़ाही का टेंडर निकलने के बाद से ही निगम प्रशासन व निगम सरकार में अंदरूनी तकरार चल रही है।null
नगर विधायक विजेंद्र चौधरी गुट का मानना है कि यह टेंडर नगर विधायक के विपक्षी गुट के करीबी को मिला। 19 अप्रैल को नगर निगम बोर्ड की बैठक में बिना प्रशासनिक स्वीकृति लिए फरदो नाले की उड़ाही का मामला विधायक ने उठाया। विजिलेंस जांच की भी चर्चा हुई। हालांकि, बोर्ड की बैठक में नगर आयुक्त नहीं थे।
गुरुवार को शहर लौटने पर नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय ने फरदो नाले की सफाई का मामला बोर्ड में उठाने को लेकर सीधा हमला बोला। निगम के वॉट्सएप ग्रुप पर नगर आयुक्त ने नाला उड़ाही से संबंधित सभी डॉक्यूमेंट सार्वजनिक कर दिया। उन्होंने बेबाक लिखा भी। उन्होंने जो लिखा, उसे दैनिक भास्कर में पढ़िए हू-ब-हू…
पौने दो करोड़ से उड़ाही शुरू, 3 हजार मीटर में से 1345 मी. सफाई हो चुकी
नगर आयुक्त का लिखा… हू-ब-हू
फरदो नाले की सफाई पहले से बोर्ड से पास है। जो लोग भी अड़ंगा लगा रहे हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक माह तक कोई आपत्ति नहीं की गई। काम आधा पूर्ण होने के बाद अब जो भी अनावश्यक विवाद उत्पन्न किया जा रहा है, ऐसा प्रतीत होता है कि निजी स्वार्थ की पूर्ति नहीं होने के कारण किया जा रहा है।
निगम हित में कराए जा रहे कार्य को, जो महापौर, उपमहापौर, स्टैंडिंग और बोर्ड सभी की अनुमति के बाद किया जा रहा है, उस पर निजी कारण से विवाद उत्पन्न करना पूर्णतया अनुचित, अनैतिक और नियम विरुद्ध है। इसका हम खुलकर विरोध करते हैं। इसे विभाग के संज्ञान में लाया जाएगा और उचित कार्यवाही की जाएगी। माननीय महापौर और उप महापौर के पत्र को सदन के साथ साझा कर रहा हूं, ताकि भ्रांतियां उत्पन्न करने का प्रयास विफल हो जाए।
- 23 दिसंबर 21 : नगर निगम बोर्ड ने सर्वसम्मति से फरदो नाले की उड़ाही टेंडर से कराने का फैसला लिया।
- 29 जनवरी 22 : डिप्टी मेयर मान मर्दन शुक्ला ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर फरदो नाले की सफाई टेंडर से जल्द शुरू कराने को कहा
- 4 फरवरी : मेयर राकेश कुमार पिंटू ने नगर आयुक्त को पत्र लिखा- जलजमाव की समस्या से शहर की बदनामी होती है। निर्देश दिया जाता है कि फरदो नाले की उड़ाही के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण करें।
- 16 मार्च : नगर आयुक्त ने टेंडर के बाद एजेंसी को काम करने का कार्यादेश जारी किया।
मेयर से सीधी बात
Q. किस तरह का निजी लाभ का मामला है? A. यह हमसे क्यों पूछते हैं। यह नगर आयुक्त से पूछिए कि वह किसके बारे में बोल रहे हैं कि निजी स्वार्थ का मामला है। Q. फरदो नाले की सफाई से शहर को जलजमाव से निजात मिले यह आप नहीं चाहते हैं? A. बिल्कुल, शहर को जलजमाव से निजात मिलना चाहिए। फरदो नाले की उड़ाही भी होनी चाहिए। लेकिन, नगर आयुक्त ने प्रक्रिया को ठीक ढंग से अंजाम नहीं दिया है। इस पर आपत्ति है। Q. इस आपत्ति के पीछे नगर विधायक के विपक्षी गुट के करीबी की एजेंसी बताई जा रही है, वह तो नहीं है? A. हम नहीं जानते कि जिसे टेंडर मिला है, वह किसका आदमी है। Q. नगर विधायक विजेंद्र चौधरी के आप करीबी हैं। विधायक ने बोर्ड की बैठक में भी बिना प्रशासनिक स्वीकृति के काम पर सवाल उठाए थे। क्या कहेंगे? A. काम को लेकर नगर विधायक को भी कोई आपत्ति नहीं है। बगैर प्रशासनिक स्वीकृति लिए काम किया जा रहा है, उस पर आपत्ति है।
मेयर के खिलाफ मोर्चाबंदी शुरू
प्रोसीडिंग लिखने वाले दोनों कर्मचारी छुट्टी पर
नगर निगम बोर्ड की बैठक में फरदो नाले की उड़ाही व कई अन्य मामले को लेकर मेयर राकेश कुमार पिंटू के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को पार्षदों ने अगली रणनीति को लेकर बैठक की। नगर निगम बोर्ड की बैठक की प्रोसीडिंग तैयार करने से जुड़े दो कर्मचारी अवकाश पर चले गए हैं। अगले तीन-चार दिनों तक दोनों के अवकाश पर रहने की संभावना है।
मेयर का विपक्षी खेमा जल्द ही उनके खिलाफ बाकी पार्षदों से संयुक्त हस्ताक्षर करवा कर कार्रवाई के लिए पत्र सौंपने की तैयारी में है। विपक्षी खेमा का कहना है कि फरदो नाले की उड़ाही नगर निगम बोर्ड से स्वीकृत है। इसके बावजूद उस पर अड़ंगा लगाया जा रहा है। बता दें कि फरदो नाले की उड़ाही पौने दो करोड़ से की जा रही है।
नाला सफाई का विरोध नहीं है। बिना प्रशासनिक स्वीकृति कैसे टेंडर हो गया। बोर्ड में जब इस सवाल को उठाया गया तो कोई पदाधिकारी जवाब नहीं दे पाया। किस नियम के तहत काम शुरू हुआ, इसका जवाब चाहिए। पूरे शहर को खोदकर बर्बाद कर दिया गया है। हम लोग बर्दाश्त कर रहे हैं। बैंक रोड में स्टॉल का मामला फंसा हुआ है। ट्रेड लाइसेंस के नाम पर व्यापारियों से जबरदस्ती हुई है। गरीबों को उजाड़ने के बाद अब तक जगह नहीं दी गई। किसी को मनमानी की छूट नहीं दी जा सकती है। जल्द ही हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे।
-विजेंद्र चौधरी, नगर विधायक
‘जनहित से जुड़े इस कार्य में बेवजह विधायक रोड़ा अटका रहे हैं। निगम बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से फरदो नाले की सफाई कराने का प्रस्ताव पारित हो चुका है। विजेंद्र चौधरी तथ्यहीन विवाद खड़ा कर जनहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य में बाधक बन रहे हैं। जनता की समस्याओं के समाधान में स्वार्थ सिद्धि नहीं होने पर बाधक बनना इनका शगल रहा है।’
-नंदकुमार प्रसाद साह “नंदू भाई”, वार्ड पार्षद



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