बिहार के पूर्णिया में मेले में शादी तय होती है। जहां पान खाना रिश्ते को मंजूरी देना होता है। स्वयंवर की ये परंपरा आदिवासी समाज में आज भी जिंदा है। यहां के आदिवासी समाज में अलग अंदाज में शादी होती है।
मेले में लड़का और लड़की एक दूसरे को पंसद करते हैं। इसके बाद दोनों के हाथों में पान दिया जाता है। लड़के की ओर से दिया हुआ पान लड़की को खाना होता है। अगर लड़की ने पान खा लिया तो शादी पक्की हो जाती है। पान खाना शादी के लिए इजाजत देने के बराबर है।
स्वंयवर की यह अनूठी परंपरा मिलिनिया गांव के आदिवासियों में है। यहां हर साल बैसाखी और सिरवा-विषवा पर्व बडे़ ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें दो दिन तक मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा व नेपाल से भारी संख्या में आदिवासी हिस्सा लेते हैं। कुंवारे लड़के-लड़की ज्यादातर संख्या में आते हैं। यहां दोनों अपना जीवनसाथी चुनते हैं। स्थानीय अनिल उरांव ने बताया कि यह आदिवासियों का काफी प्राचीन परंपरा है। पान खाने के बाद लड़की लड़का के घर चली जाती है। दोनों साथ रहने लगते हैं। कुछ दिनों बाद दोनों की शादी होती है।

मेले में करतब दिखाते लोग।
परंपरा में कई कानून भी
इस परंपरा में कड़े कानून भी हैं। पान खाने और एक दूसरे के साथ रहने के बाद दोनों शादी करने के लिए बाध्य है। यदि किसी ने शादी करने से इंकार कर दिया तो वैसे जोड़े को आदिवासी समाज दंडित करता है। उन्हें गांव से निकाल भी दिया जाता है।
मेले में 130 जोड़ी ने खिलाए पान
इस साल सिरुवा मेले में 130 जोड़ी ने एक-दूसरे को पसंद किया। लड़कियों ने पान खाकर जीवनसाथी को चुना। दो दिन तक चलने वाले इस मेले में 130 युगल जोड़ी की शादी निश्चित मानी जा रही है। मेले की दूसरी खासियत यह है कि यहां आए लोग एक दूसरे को कीचड़ और अबीर-गुलाल लगाकर बधाई देते हैं। पूरे पर्व को होली जैसा मनाते हैं।



Leave a Reply