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इस बार महाशिवरात्रि पर बन रहा महासंयोग, इस विधि से करें भगवान शिव की आराधना होगी विशेष फल की प्राप्ति ‘ॐ नमः शिवाय’

इस साल 21 फरवरी को महाशिवरात्रि पर वर्षों बाद महासंयोग बन रहा है, जो साधना व सिद्धि के लिए खास है। पंडितों की मानें तो वर्ष 1903 में शनि और शुक्र के संयोग से ऐसा ही शैशव योग बना था। इस दिन ग्रहों के कारण बुधादित्य योग, सर्वार्थ सिद्घि योग, लक्ष्मीकारक योग आदि का निर्माण भी हो रहा है। इस दुर्ल’भ योग में शिव आराधना से सिद्घि प्राप्ति और दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है।जगदंबा नगर, बैरिया के आचार्य अभिनय पाठक बताते हैं कि शास्त्रों में महाशिवरात्रि को सिद्घ रात्रि बताई गई है। इस रात्रि में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है।

इस दिन व्रत रखते हुए रात्रि में चारों पहर शिवजी को पंचामृत, गंगाजल आदि से अभिषेक कर आरती करनी चाहिए। इस व्रत को लगातार 14 वर्षों तक करने से सभी सिद्घियों की प्राप्ति होती है।रामदयालु स्थित मां मनोकामना देवी मंदिर के पुजारी पंडित रमेश मिश्र बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक दान पुण्य करना चाहिए। श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ शिव-पार्वती की पूजा करने से उनका आशीर्वाद मिलता है।

नगर थाना में शांति समिति की बैठक

शिवरात्रि के अवसर पर निकाली जाने वाली शिव बरात में शांति व सौहार्द कायम रखने को लेकर शनिवार को शांति समिति की बैठक हुई। नगर थाना में बैठक की अध्यक्षता नगर थानाध्यक्ष ओमप्रकाश ने की। इस दौरान उपस्थित लोगों ने हर साल की भांति इस बार भी शिवरात्रि व शिव बरात को भक्तिभाव से मनाने का संकल्प लिया। मौके पर बाबा गरीबनाथ धाम के प्रशासक पंडित विनय पाठक, चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष मोतीलाल छापडिय़ा, वसीउल हक रिजवी, भोला चौधरी, पाले खान, शीतल गुप्ता, महेश महतो, रेयाज अंसारी व जितेंद्र थे।

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