2019 में औरंगाबाद और गया में दो दिनों में लू से 137 लोगों की मौत हो गई। मौसम इस बार भी कुछ वैसा ही बन रहा है। प्रचंड गर्मी और तेज हवा के कारण खतरा बढ़ रहा है। हीट वेव के खतरे को देखते हुए मौसम विभाग 2019 में हुई घटना की पुनरावृत्ति को लेकर डरा हुआ है। आपदा विभाग से लेकर राज्य सरकार भी अलर्ट पर अलर्ट जारी कर रही है। आइए जानते हैं कि गर्मी में तेज हवा कांबीनेशन कैसे मौत का कारण बनता है।
शरीर के तापमान से अधिक गर्मी
मौसम विज्ञान केंद्र के शैलेंद्र पटेल बताते हैं कि प्रचंड गर्मी में तापमान शरीर से अधिक हो जाता है। इंसानों का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट माना जाता है। सेंटिग्रेट में इसे 36.2 से 37.2 के बीच सामान्य माना जाता है। मौजूदा समय में राज्य में गर्मी 43 से 44 डिग्री सेल्सियस पहुंच गई है। ऐसे में यह सामान्य से लगभग 6 डिग्री अधिक है। इस स्थिति में जब 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गर्म हवाएं चलती हैं तो खतरा बढ़ जाता है। पटना एम्स के ट्रामा इमरजेंसी के एचओडी डॉ अनिल कुमार का कहना है कि हीट वेव वाले एरिया में जब गर्म हवाएं तेज होती हैं, तो मुंह सूखने लगता है। ऐसे में इलेक्ट्रोलाइट्स इन बैलेंस हो जाता है जो काफी खतरनाक हो जाता है।
ब्लड क्लॉटिंग से होती है मौत
पटना के फिजीशियन डॉ राना एसपी सिंह बताते हैं कि जब शरीर के तापमान से बाहरी तापमान अधिक होता है तो इलेक्ट्रोलाइट्स इन बैलेंस हो जाता है। शरीर से पानी तेजी से सूखने लगता है। इस दशा में पानी, मिनिरल और अन्य केमिकल सूखने लगते हैं। इससे शरीर में ब्लड की क्लॉटिंग होने लगती है। ब्लड क्लॉटिंग से ही हालत गंभीर होती है और हार्ट काम करना बंद कर देता है। शरीर में पानी की कमी के साथ गर्म हवाएं मल्टीपल ऑर्गन फेल होने का खतरा भी बढ़ा देती हैं। डायरिया और बुखार में भी इलेक्ट्रोलाइट्स इन बैलेंस होता है, इससे मौत होती है।
जानिए कब होता है हीट वेव
मौसम विभाग का कहना है कि जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाए और संबंधित इलाके के सामान्य तापमान से पारा 4.5 डिग्री ऊपर हो जाए तो हीट वेव माना जाता है। इस पर गर्म हवाएं हमेशा जानलेवा होती हैं। अगर गर्म हवा की रफ्तार 25 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अधिक होता है जो शरीर पर इसका बड़ा साइड इफेक्ट होता है और यही मौत का कारण बनने लगता है।
जानिए राजस्थान और बिहार में फर्क
मौसम वैज्ञानिक आशीष बताते हैं कि राजस्थान में गर्मी अधिक पड़ती है, वहां के लोगों के लिए यह सामान्य बात है। इस कारण से उनका शरीर गर्मी को बर्दाश्त करने की क्षमता रखता है। बिहार में अचानक से ऐसे मौसम आता है, लोगों के शरीर में भी बर्दाश्त करने की क्षमता कम होती है। राजस्थान और बिहार में यही फर्क होता है। राजस्थान में गर्मी होने के बाद भी मौत का खतरा कम होने का यह बडा कारण है। बिहार के पठारी क्षेत्रों औरंगाबाद, गया, बांका, जमुई सहित आस पास के जिलों में प्रचंड गर्मी के बीच हीट वेव है। यहां गर्म हवा का प्रवाह भी 20 से 22 डिग्री प्रति घंटे की रफ्तार से हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दशा में कमजोर लोगों के लिए मौत का खतरा है। इस कारण से राज्य के लोगों को दोपहर में घर से बाहर नहीं निकलने को लेकर चेतावनी दी जा रही है।



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